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अयोध्या राममंदिर में दानपात्रों से करोड़ों की हेराफेरी के बाद से ही मंदिर प्रशासनिक ढांचा बदलने और पेशेवर व पारदर्शी करने पर जोर दिया जा रहा है. इसी के लिए मंदिर में चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर की नियुक्ती होगी. इसकी प्रक्रिया तेजी से चल रही है.
अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में हर दिन लाखों भक्त पहुंचते हैं. लोग आस्था के साथ ही यहां दिन खोलकर दान करते हैं, लेकिन भक्तों को झटका तब लगा, जब मंदिर के दानपात्रों से ही श्रद्धा और भाव से किया गया दान चोरी हो गया. इससे रामभक्तों के मन तमाम तरह के सवाल खड़े हो गये. आखिर किसी सह पर रामलला का खजाना चोरी किया गया. इसमें कौन जिम्मेदार है. इन सभी बातों का पता लगाने में एसआईटी जुटी है, लेकिन ऐसा दोबारा न हो. इसके लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब अयोध्या में राम मंदिर का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह पेशेवर और पारदर्शी होने जा रहा है. इसके लिए एक चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर की नियुक्ती होगी. इस पद के लिए देश भर से 5300 आवेदन किये गये हैं...
जून महीने में सामने आए दान घोटाले के बाद ट्रस्ट ने मंदिर के कामकाज, रखरखाव और वित्तीय निगरानी के लिए पहली बार चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) की नियुक्ति का फैसला किया है. इस प्रतिष्ठित पद के लिए देश भर से 5300 से भी ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें से ट्रस्ट ने सिर्फ 18 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया है. इन 18 दिग्गजों का इंटरव्यू अयोध्या स्थित राम मंदिर परिसर में ही आयोजित किया जा रहा है. इंटरव्यू बोर्ड में कोई साधारण लोग नहीं, बल्कि पूर्व न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विश्वकांत चतुर्वेदी और शिरडी साईं बाबा ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष व वैज्ञानिक सुरेश हावरे जैसे दिग्गज शामिल हैं, जो उम्मीदवारों की प्रशासनिक क्षमता और ईमानदारी को परख रहे हैं.
आमतौर पर किसी कॉरपोरेट या सरकारी पद के लिए सिर्फ अनुभव और प्रशासनिक डिग्री देखी जाती है, लेकिन राम मंदिर के CEO पद के लिए शर्तें थोड़ी अलग और सख्त रखी गई है. इसमें सबसे पहले उम्मीदवार की उम्र 50 से 70 वर्ष के बीच रखी गई है ताकि उनके पास प्रशासनिक अनुभव का समृद्ध भंडार हो. इसके साथ ही व्यक्ति पूर्ण शाकाहारी और नशामुक्त हो. वह किसी भी तरह का नशा न करता हो. उम्मीदवार का सनातनी परंपराओं, हिंदू मान्यताओं और राम मंदिर की मर्यादा का कड़ाई से पालन करने वाला होना जरूरी है.
जून की शुरुआत में जब राम मंदिर के दान में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की बात सामने आई, तो हड़कंप मच गया. स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में 25 जून को एफआईआर दर्ज हुई और अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा समेत 8 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने आरोपियों के पास से 20 लाख रुपये से ज्यादा नकद, सोना-चांदी बरामद की है. इस घटना ने ट्रस्ट की आंखें खोल दीं. यह साफ हो गया कि सिर्फ अनौपचारिक व्यवस्था के भरोसे करोड़ों रुपये के दान, वीआईपी मूवमेंट, सुरक्षा और मंदिर प्रबंधन को संभालना संभव नहीं है. अब नये CEO के पास प्रशासनिक शक्तियां होंगी, जिससे एक एक रुपये के दान और व्यवस्था का पूरा डिजिटल व ऑडिटेड रिकॉर्ड रखा जा सके.