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भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला इस समय Axiom-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर हैं और वे 10 जुलाई 2025 के बाद किसी भी दिन पृथ्वी पर लौट सकते हैं, बशर्ते फ्लोरिडा तट पर मौसम अनुकूल हो.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला वर्तमान में Axiom-4 मिशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे हैं. उनका मिशन 14 दिन तक चल सकता है और 10 जुलाई 2025 के बाद मौसम अनुकूल होने पर वे किसी भी दिन पृथ्वी पर लौट सकते हैं.
शुभांशु ने IIT धारवाड़ और यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, धरवाड़ के वैज्ञानिकों सुधीर सिद्धापुरेड्डी और रविकुमार होसमानी के साथ मिलकर एक विशेष बीज अंकुरण प्रयोग किया है. इसमें मेथी और मूंग के बीजों को पेट्री डिश में उगाया गया है. उनकी तस्वीरें ली गईं और जब ये बीज पृथ्वी पर वापस आएंगे, तो कई पीढ़ियों तक इनका परीक्षण किया जाएगा.
इस प्रयोग का उद्देश्य यह समझना है कि अंतरिक्ष में पौधों की वृद्धि और उनका पोषण मूल्य किस प्रकार प्रभावित होता है, और क्या ये पौधे भविष्य की चंद्रमा या मंगल मिशनों के दौरान भोजन के स्रोत बन सकते हैं.
एक अन्य प्रयोग में शुभांशु ने माइक्रोएल्गी (सूक्ष्म शैवाल) को अंतरिक्ष में उगाया और संग्रहित किया. इन एल्गी में भोजन, ऑक्सीजन और बायोफ्यूल उत्पादन की क्षमता है. यह भविष्य में लंबी अंतरिक्ष यात्राओं के लिए सस्टेनेबल लाइफ सपोर्ट सिस्टम तैयार करने में सहायक सिद्ध हो सकता है.
जब शुभांशु पृथ्वी पर लौटेंगे, तो उनके साथ लाए गए बीजों और शैवाल के सैंपल्स का भारतीय वैज्ञानिक विस्तृत विश्लेषण करेंगे. यह शोध अंतरिक्ष में खेती और भोजन की सुरक्षा के साथ-साथ मंगल मिशन जैसी दीर्घकालिक अंतरिक्ष यात्राओं के लिए उपयोगी होगा.
इस मिशन में ISRO का सहयोग भारत की वैज्ञानिक क्षमता और अंतरिक्ष अनुसंधान में सक्रिय भूमिका को दर्शाता है. शुभांशु का यह मिशन न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत को वैश्विक अंतरिक्ष विज्ञान में एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है.
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