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हाईकोर्ट के जज जस्टिस मनोज जैन सीबीआई की रिव्यू पीटिशन पर 17 और 18 अगस्त को सुनवाई करेंगे. सीबीआई की याचिका में अधीनस्थ अदालत के 27 फरवरी के फैसले को चुनौती दी गई है.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाईकोर्ट से आबकारी नीति मामले में सीबीआई की याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया है. उन्होंने याचिका की वैधता पर सवाल उठाए हैं. सीबआई ने आप नेताओं को आबकारी नीति मामले में आरोप मुक्त किए जाने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है. दिल्ली की एक अदालत ने आबकारी नीति घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के कविता समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ सीबीआई ने रिव्यू पीटीशन दायर की थी. सोमवार (10 अगस्त, 2026) को दोनों नेताओं ने हाईकोर्ट से याचिका खारिज किए जान के लिए गुहार लगाई.
सीबीआई की याचिका को अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिता ने जल्दबाजी और बेहद गैर-गंभीर तरीके से दायर की गई बताया. दोनों आप नेताओं ने सीबीआई की रिव्यू पीटिशन स्वीकार किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि ये याचिका अधूरी है, निचली अदालत के फैसले को पूरा समझे बिना ही जल्दबाजी में याचिका दाखिल कर दी गई. आप नेताओं की तरफ से दाखिल याचिकाओं में कहा गया कि अधीनस्थ अदालत ने तीन महीने से ज्यादा समय तक मामले की विस्तार से सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था, लेकिन सीबीआई ने ऐसा कोई खास निष्कर्ष नहीं बताया है जो गलत हो या जिसमें कोई अनियमितता दिखाई दे. वहीं, सीबीआई का कहना है कि निचली अदालत ने जांच के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया है और साक्ष्यों पर भी सही से विचार नहीं किया गया.
याचिका में कहा गया, 'सीबीआई ने यह रिव्यू पीटिशन बहुत ज्यादा जल्दबाजी में और बिना गंभीरता के दायर की है. विशेष न्यायाधीश के आरोप मुक्त करने के आदेश के सिर्फ चार घंटे के अंदर ही यह याचिका दायर कर दी गई थी. इससे साफ है कि सीबीआई ने 500 से ज्यादा पन्नों वाले कोर्ट के आदेश में विशेष न्यायाधीश की बातों और निष्कर्षों को ठीक से नहीं समझा.' याचिका में कहा गया कि इस तरह, अगर ऐसी याचिका को सुनवाई के लायक माना जाता है तो प्रतिवादी को गंभीर नुकसान होगा.
हाईकोर्ट के जज जस्टिस मनोज जैन सीबीआई की रिव्यू पीटिशन पर 17 और 18 अगस्त को सुनवाई करेंगे. सीबीआई की याचिका में अधीनस्थ अदालत के 27 फरवरी के फैसले को चुनौती दी गई है. पिछली बार, जस्टिस मनोज जैन ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को याचिका का जवाब देने के लिए दो हफ्ते का आखिरी मौका दिया था.
यह मामला दिल्ली सरकार की 2021 की आबकारी नीति से जुड़ा है. उस समय दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी, अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री थे और मनीष सिसोदिया डिप्टी सीएम. कार्यान्वयन में अनियमितता के आरोपों के बाद नीति को वापस ले लिया गया था, जिसके बाद दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सीबीआई को नीति की जांच का आदेश दिया था. इस सिलसिले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जेल भी गए थे. 2024 में कोर्ट ने मुकदमे में देरी को देखते हुए जमानत दे दी थी.
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