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Lok Sabha Elections 2024: केजरीवाल को जमानत से दिल्ली में बीजेपी को होगा नुकसान? समझें राजनीतिक समीकरण

AAP Vs BJP In Delhi: सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत के बाद अरविंद केजरीवाल अब दिल्ली और पंजाब में सक्रिय ढंग से चुनाव प्रचार कर रहे हैं. इससे बीजेपी के लिए खतरे की घंटी बज गई है?

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Lok Sabha Elections 2024: केजरीवाल को जमानत से दिल्ली में बीजेपी को होगा नुकसान? समझें राजनीतिक समीकरण
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लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha Elections 2024) में बीजेपी के लिए दिल्ली की सातों सीटें जीतना एक बड़ी चुनौती है. पार्टी लगातार तीसरी बार सातों सीटें जीतकर इतिहास रचना चाहती है. दूसरी ओर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (INDIA Alliance) मिलकर चुनाव लड़ रही हैं. बीजेपी ने क्लीन स्वीप के लिए 7 में से 6 उम्मीदवार बदल दिए हैं. पार्टी ने बांसुरी स्वराज जैसे युवा चेहरों को मौका दिया है. हालांकि, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के जमानत पर बाहर होने के बाद चुनावी हवा बदलने के भी कयास लगाए जा रहे हैं. समझें इसके रणनीतिक मायने. 

अरविंद केजरीवाल को मिलेगी जनता की सहानुभूति? 
दिल्ली शराब नीति केस (Delhi Liquor Policy Case) में अरविंद केजरीवाल को भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अरेस्ट किया है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 1 जून तक के लिए अंतरिम जमानत दी है. इस दौरान केजरीवाल दिल्ली और पंजाब में अपनी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करेंगे. प्रचार की शुरुआत ही आप संयोजक ने जनता की सहानुभूति बटोरने वाले अंदाज में की है. 


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जेल में इंसुलिन नहीं देने से लेकर मारने की साजिश तक का आरोप बीजेपी और जांच एजेंसी पर लगा चुके हैं. आम आदमी पार्टी के समर्थकों को उम्मीद है कि जनता की पूरी सहानुभूति केजरीवाल के साथ है. हालांकि, यह सहानुभूति वोटों में बदलती है या नहीं यह देखना होगा.

BJP के पास भी है अपनी सटीक रणनीति 
दिल्ली के विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल को भले ही 2015 और 2020 में सफलता मिली हो, लेकिन लोकसभा चुनाव में उनका मैजिक नहीं चला है. दिल्ली की जनता लगातार दो लोकसभा चुनाव में सातों सीटें पीएम मोदी के नाम पर बीजेपी को दे रही है. पार्टी ने स्थानीय सांसदों के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए 6 उम्मीदवार भी बदल दिए हैं.


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मोदी की गारंटी, केंद्र सरकार की राशन योजना, उज्ज्वला के लाभार्थी वोटर अभी भी बीजेपी के साथ हैं. इसके अलावा, पीएम मोदी का चेहरा भी हैं. ऐसे में सिर्फ सहानुभूति के भरोसे इंडिया अलायंस के लिए सातों सीटें निकालना बहुत मुश्किल होने वाला है. 

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