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बच्चन परिवार के वकील ने दलील दी कि इस मामले में सिर्फ आराध्या ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के नाम और प्रतिष्ठा का सवाल है. अगर साख बरकरार है तो गलत जानकारी फैलाने की किसी भी कोशिश या उस साख को कोई नुकसान पहुंचने देने से रोकना जरूरी है.
Aradhya Bachchan Case: एक्टर अभिषेक बच्चन और एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन की बेटी आराध्या बच्चन से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (13 अगस्त, 2026) को कई अहम कानूनी सवाल पूछे. कोर्ट ने सवाल उठाया कि किसी चर्चित और फेमस परिवार के नाम से जुड़ी प्रतिष्ठा और गुडविल कितनी पीढ़ियों तक आगे बढ़ सकती है. कोर्ट ने इसे भी विचार का विषय बनाया कि किसी व्यक्ति के बारे में इंटरनेट पर फैलाई गई फर्जी खबरें क्या बौद्धिक संपदा या आईपी अधिकारों का उल्लंघन मानी जा सकती हैं.
आराध्या बच्चन के बारे में सोशल मीडिया पर गुमराह करने वाली सामग्री प्रसारित करने से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सवाल किया कि क्या परिवार के नाम से बनी प्रतिष्ठा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रहती है? आराध्या बच्चन ने पिता अभिषेक बच्चन के माध्यम से साल 2023 में एक वाद दायर किया था, जिसमें आरोप लगाए गए थे कि यूट्यूब पर आराध्य की हेल्थ और उनकी निजी जिंदगी के बारे में पूरी तरह से झूठे वीडियो प्रसारित किए गए.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की बेंच के सामने बच्चन परिवार की तरफ से सीनियर एडोवकेट प्रवीण आनंद पेश हुए. उन्होंने दलील दी कि इस मामले में सिर्फ आराध्या ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के नाम और प्रतिष्ठा का सवाल है. वकील ने कहा कि अगर साख बरकरार है तो गलत जानकारी फैलाने की किसी भी कोशिश या उस साख को कोई नुकसान पहुंचने देने से रोकना जरूरी है. उन्होंने कहा कि कुछ समय बाद साख खत्म हो सकती है, लेकिन यहां पूरे परिवार की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है. वकील ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चन नाम का इस्तेमाल करके फेक न्यूज फैलाई जा रही हैं. कोर्ट ने ट्रेडमार्क और किसी व्यक्ति या परिवार के नाम से जुड़ी प्रतिष्ठा में अतर को लेकर सवाल उठाया.
जस्टिस जयराम भंभानी ने पूछा, 'अगर किसी परिवार का नाम किसी ट्रेडमार्क से जुड़ी प्रतिष्ठा जैसा हो, तो आने वाली कितनी पीढ़ियों तक परिवार के नाम की प्रतिष्ठा का लाभ मिलता रहेगा?' हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रेडमार्क और उसकी प्रतिष्ठा किसी उत्पाद या सेवा से जुड़ी होती है, लेकिन जब आप किसी व्यक्ति के बारे में बात करते हैं, तो यह मामला संदर्भ के हिसाब से कुछ हद तक अलग हो जाता है.
जज ने सवाल किया, 'किसी खास सरनेम की अपनी एक प्रतिष्ठा होती है, जो उपलब्धियों, किसी विशेष क्षेत्र में मिली पॉप्युलैरिटी से बनती है. तो क्या वह प्रतिष्ठा... जिसे आप असल में एक ट्रेडमार्क की तरह बता रहे हैं... पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती है और अगर ऐसा है, तो इसकी हद क्या होगी?' यह सवाल इस मामले की सुनवाई का अहम पहलू बन गया है.
आराध्या और अभिषेक बच्चन की याचिका में कई यूट्यूब चैनल्स और अनजान लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी, इसमें आरोप लगाया गया था सोशल मीडिया पर ऐसा कंटेंट प्रसारित किया जा रहा है, जिसकी वजह से बच्चन परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है और यह आराध्या की प्राइवेसी को भी प्रभावित करता है. 20 अप्रैल, 2023 को कोर्ट ने कई यूट्यूब चैनल्स को आराध्या बच्चन की सेहत के बारे में गुमराह करने वाली सामग्री प्रसारित करने से रोक दिया था. कोर्ट ने कहा था कि किसी बच्ची के बारे में गलत जानकारी फैलाना बीमार मानसिकता को दिखाता है और गूगल ऐसी सामग्री का प्रसार करने की इजाजत नहीं दे सकता.
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