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Anand Mohan ने जेल से बाहर आकर कर डाली मीटिंग? 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड, जांच के आदेश

Anand Mohan Bihar: हत्या के मामले में दोषी आनंद मोहन आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. जेल के बाहर एक सभा में आनंद मोहन की तस्वीरें सामने आने के बाद 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है.

Anand Mohan ने जेल से बाहर आकर कर डाली मीटिंग? 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड, जांच के आदेश

बैठक में हिस्सा लेता दिखा था आनंद मोहन

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डीएनए हिंदी: बिहार के गोपालगंज जिले के जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में आनंद मोहन को आजीवन करावास की सजा हुई है. वह जेल में बंद है. अचानक सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई जिसमें देखा गया कि आनंद मोहन एक सभा में हिस्सा ले रहा है. आरोप है कि पुलिसकर्मियों की मिलीभगत की वजह से आनंद मोहन बिना किसी परोल के ही जेल से बाहर गया था. इस मामले में पुलिस अभिरक्षा में कथित रूप से घर जाने की अनुमति के आरोप में छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है. 

सहरसा जिला पुलिस की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, निलंबन का आदेश सहरसा की पुलिस अधीक्षक लिपि सिंह ने दिया है, जिन्हें पुलिस मुख्यालय ने आनंद मोहन की परिवार के साथ वायरल एक तस्वीर की जांच करने का निर्देश दिया था. बयान में कहा गया है कि सभी निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं. सहरसा पुलिस ने बताया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे मोहन को पिछले सप्ताह पटना लाया गया था, जहां उसे एक अदालत में पेश किया गया. 

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सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी आनंद मोहन की तस्वीर
इस बीच, पटना यात्रा के दो दिन बाद आनंद मोहन की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें आनंद मोहन, अपनी पत्नी लवली आनंद और बेटे चेतन आनंद के साथ देखा गया. चेतन आनंद फिलहाल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधायक हैं. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'जंगल राज की वापसी' करार देते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी के एक विधायक के दोषी पिता खुलेआम घूम रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह हमारे इस डर की पुष्टि करता है कि आरजेडी की सत्ता में वापसी बिहार में अराजकता को वापस लाएगी, जो लालू-राबड़ी शासन की विशेषता है. 

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आपको बता दें कि पूर्व सांसद और बाहुबली आनंद मोहन जनता दल से जुड़ा था लेकिन बाद में उसने अपनी पार्टी बना ली थी. वह शुरुआती दौर में हमेशा हथियारबंद गुर्गों से घिरे रहने और हथियार लिए हुए फोटो खिंचवाना पसंद करता था. आनंद मोहन और उसकी पत्नी दोनों पूर्व में राज्य विधानसभा और लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं. आनंद मोहन के पुत्र और आरजेडी विधायक चेतन आनंद ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि तस्वीर एक अस्पताल की थी. 

आरजेडी विधायक चेतन आनंद बोले- बैठक की बाकी तस्वीरें दिखाए मीडिया
चेतन आनंद ने कहा, 'मेरे पिता को हाई बीपी की समस्या है और रक्षाबंधन के कारण अदालत ने दोपहर में काम शुरू किया. गर्मी और उमस भरे मौसम में अदालत के बाहर प्रतीक्षा करते हुए मेरे पिता की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें चिकित्सा सहायता के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां मैं और मेरी मां घटना की जानकारी के लिए गए थे.' विधायक ने कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने ऐसी तस्वीर पेश की, जिसमें यह दावा किया गया मेरे पिता अपने समर्थकों के साथ बैठक कर रहे थे. उन्होंने कहा कि उन्हें बैठक की तस्वीरें भी दिखाने दें. 

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आरजेडी नेता ने कहा कि बीजेपी को आज मेरे पिता से बहुत सी समस्याएं हैं लेकिन उस वक्त ठीक था, जब उन्होंने 1998 के विश्वास मत के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का समर्थन किया और 10 अन्य सांसदों को भी ऐसा करने के लिए मना लिया था. आनंद मोहन को निचली अदालत ने गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी कृष्णैया की 1994 में मुजफ्फरपुर के बाहरी इलाके में हुई हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई थी. बाद में पटना हाई कोर्ट ने मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था. हालांकि, मामले के कई अन्य सह अभियुक्तों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था.

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