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आयुष ने अपने दोस्त सुल्तान के जरिए याचिका दायर करवाई थी, जिस पर जस्टिस संदीप जैन सुनवाई कर रहे थे. उन्होंने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता बालिग है और वह जो कुछ भी कर रहा है अपनी इच्छा के मुताबिक कर रहा है, उसको ऐसा करने की आजादी है.
इस्लाम धर्म अपनाकर मुस्लिम लड़की से शादी करने वाले एक बेटे ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में आरोप लगाया है कि उसके पिता ने उसको अवैध तरीके से बंधक बनाकर रखा है. बेटे ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पिता के खिलाफ याचिका दाखिल की थी, जिसका निपटारा करते हुए कोर्ट ने कहा कि लड़का बालिग है और उसने जो आरोप लगाए हैं वे काफी गंभीर हैं. इससे पहले, नौ सितंबर को हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के पिता को निर्देश दिया था कि 16 सितंबर की सुनवाई में वह बेटे को भी पेश करें.
आयुष मलिक ने कोर्ट में कहा है कि उसने अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म कबूल किया है. आयुष ने अपने दोस्त सुल्तान के जरिए याचिका दायर करवाई थी, जिस पर जस्टिस संदीप जैन सुनवाई कर रहे थे. बुधवार (16 सितंबर, 2026) को उन्होंने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता बालिग है और वह जो कुछ भी कर रहा है अपनी इच्छा के मुताबिक कर रहा है, उसको ऐसा करने की आजादी है. आयुष की उम्र 31 साल है और उसने कोर्ट को बताया कि उसने अपनी स्वेच्छा से और बिना किसी अनुचित प्रभाव या लालच के हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया है. कोर्ट को यह भी बताया गया कि आयुष ने अपने पिता देवराज सिंह मलिक की इच्छा के खिलाफ जाकर चांदनी कुरैशी से शादी की थी.
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि मुस्लिम लड़की से शादी करने से आयुष के पिता नाराज थे और उन्होंने शामली जिले के शामली थाने में चांदनी कुरैशी और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ उप्र विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 और बीएनएस की कुछ धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी. आयुष के वकील ने आरोप लगाया कि देवराज सिंह ने उनके मुवक्किल को अवैध रूप से बंधी बनाकर रखा, जिसमें उन्हें अधिकारियों का भी सहयोग मिला.
पहले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा था कि इस रिट पेटीशन के साथ अटैच दस्तावेजों पर गौर करने से प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि आयुष मलिक ने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया है और फिर अपने पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर चांदनी कुरैशी से शादी कर ली. कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि इस वजह से आयुष के पिता ने प्राथमिकी दर्ज कराई. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील ने जो आरोप देवराज सिंह मलिक पर लगाए हैं, वे काफी गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए इस अदालत की ओर से इन पर तत्काल विचार वांछित हैं.
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