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PFI पर केंद्रीय जांच एजेंसियों ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की है जिसके पीछे मुख्य भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की बताई जा रही है.
डीएनए हिंदी: पिछले दो दिनों में देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए लगातार चुनौती बन रहे संगठन PFI के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई की है. इस मामले में करीब 106 लोगों की गिरफ्तारी के साथ ही अनेकों दस्तावेज भी जब्त किए गए. वहीं इस गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन करने वाले भी 500 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया लेकिन इस पूरे एक्शन के पीछे लगे दिमाग के बारे में आपको पता है क्योंकि यह मास्टर प्लान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (Ajit Doval) की मौजूदगी में lतैयार हुआ था.
11 राज्यों में छापेमारी से लेकर गिरफ्तारी तक का एक्शन अचानक नहीं हुआ बल्कि इसके पीछे एक बड़ी प्लानिंग हुई थी. इस दौरान पीएफआई द्वारा किए गए एक-एक दंगे और सांप्रदायिक हिंसा के मामलों को जोड़कर एक बड़ा डोजियर तैयार किया गया. इसके अलावा दिल्ली में इसको लेकर अजीत डोभाल ने आईबी के चीफ ने इस एक्शन प्लान का पूरा बेस तैयार कर अधिकारियों को निर्देश दिए थे. अहम बात यह है कि यह सारा काम रात के अंधेरे में दिल्ली के किसी अज्ञात स्पेशल कंट्रोल रूम में हुआ था.
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वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले महीने यानी अगस्त में गृह मंत्री अमित शाह ने PFI पर कार्रवाई करने के लिए NSA अजीत डोभाल, IB चीफ तपन डेका और RAW चीफ सामंत गोयल के साथ एक अहम बैठक की थी और इसको लेकर सभी को सख्त निर्देश दिए गए थे. इस बैठक में ही अमित शाह (Amit Shah) द्वारा PFI की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की जानकारी जुटाने का फैसला हुआ था जिसके साथ एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया गया था.
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वहीं इस मामले में ANI ने बताया कि PFI पर जांच एजेंसी की कार्रवाई का नाम ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ रखा गया था. 22 सितंबर को 15 राज्यों में एनआईए, ईडी और राज्य पुलिस की एक संयुक्त टीम द्वारा किए 96 स्थानों जगहों पर छापे में 106 से अधिक पीएफआई सदस्यों को गिरफ्तार किया गया. इनमें कई राज्यों के पीएफआई चीफ भी शामिल हैं और अब इन सभी के खिलाफ सख्त एक्शन की तैयारी की जा रही है.
जानकारी के मुताबिक PFI पर कार्रवाई वाले ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए कई आईजी-एडीजी से लेकर सैकड़ों अफसर और पुलिस जवान तैनात किए गए थे. इस ऑपरेशन ऑक्टोपस की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम बनाए गए थे, जिसके जरिए पल-पल की हरकत पर नजर रखी जा रही थी. इसके साथ ही विरोध प्रदर्शन और दंगों जैसी स्थिति से निपटने के लिए भी खास प्लान तैयार किया गया था. अधिकारियों ने 15 राज्यों में 96 स्थानों पर की गई छापेमारी को अब तक की सबसे बड़ी जांच बताया है जो कि सफलता पूर्वक संपन्न भी हुई.
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अब PFI के समर्थक आंदोलन कर रहे हैं और कुछ इलाकों में छुट-पुट हिंसा भी देखने को मिली लेकिन बाकी जगहों पर स्थिति कंट्रोल में है. ऐसे में यह माना जा रहा है कि पकड़े गए लोगों से पूछताछ के बाद इसी केस से जुड़े मामले में अन्य लोगों को भी शिकंजे में लिया जा सकता है जो कि अलगाववाद से लेकर आतंकवाद तक को भारत में बढ़ावा दे रहे थे.
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