भारत
अहमदाबाद विमान हादसे में 250 लोगों से भी ज्यादा मौत हो चुकी है. जिसके बाद इस हादसे की जानकरी जुटाने के लिए ब्लैक बॉक्स की खोजबीन जारी थी. लेकिन कभी आपने सोच है कि इतनी भयानक आग लगने के बाद भी ब्लैक बॉक्स सुरक्षित कैसे रहता है.
Black Box: 12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया का एक विमान क्रैश हुआ हादसे के बाद चारों तरफ मलबा और आग फैली थी, लेकिन शुक्रवार को उसी मलबे से ब्लैक बॉक्स सुरक्षित हालत में मिल गया. ये छोटा-सा उपकरण अब इस हादसे की सबसे बड़ी गवाही देगा. सवाल उठता है कि जब पूरा विमान जलकर खाक हो गया, तब ब्लैक बॉक्स कैसे बचा रहा? इसका जवाब इसकी खास बनावट और टेक्नोलॉजी में छुपा है. आइए समझते हैं कि ब्लैक बॉक्स क्या होता है, कैसे काम करता है और क्यों किसी भी विमान हादसे की जांच में सबसे अहम होता है.
ब्लैक बॉक्स किसी भी विमान का सबसे मजबूत और खास उपकरण होता है. अहमदाबाद में क्रैश हुए एयर इंडिया विमान से जब ये बॉक्स बरामद किया गया, तो जांच एजेंसियों को बड़ी राहत मिली. इसके अंदर वही जानकारी होती है, जिससे हादसे के कारणों का पता चलता है. आपको बता दें ब्लैक बॉक्स दो हिस्सों में बंटा होता है —
अब बात करते हैं इसकी मजबूती की. ब्लैक बॉक्स को टाइटेनियम और स्टेनलेस स्टील जैसी धातुओं से बनाया जाता है. यह 1100 डिग्री सेल्सियस तक की आग और समंदर की 6000 मीटर गहराई तक के दबाव को भी सह सकता है. हादसे के बाद अगर विमान समंदर में गिरता है, तो इसमें लगा बीकन सिग्नल भेजता रहता है जिससे उसे ढूंढना आसान हो जाता है.
यह भी पढ़ें: Ahmedabad Plane Crash: DGCA का बड़ा फैसला, Air India के सभी बोइंग ड्रीमलाइनर विमानों की होगी सुरक्षा जांच
अब आप सोच रहे होंगे कि इसे 'ब्लैक बॉक्स' क्यों कहते हैं जब इसका रंग नारंगी होता है? असल में, इसे ब्लैक बॉक्स इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पूरी तरह बंद होता है और इसके अंदर की रिकॉर्डिंग आमतौर पर गुप्त रहती है. ऑरेंज रंग इसलिए चुना गया ताकि यह मलबे में आसानी से दिख सके. ब्लैक बॉक्स की शुरुआत 1930 के दशक में हुई थी और अब ये इतनी आधुनिक तकनीक से लैस है कि इसमें महीनों तक डेटा सुरक्षित रह सकता है. बहरहाल इस हादसे के पीछे की असली वजह जानने के लिए अब जांच टीमें ब्लैक बॉक्स का डेटा डीकोड करेंगी.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.