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तृणमूल ही नहीं...कांग्रेस में विलय कर 'घर वापसी' कर सकती हैं ये दो बड़ी पार्टियां, पर्दे के पीछे बातचीत की अटकलें तेज

शरद पवार की अगुवाई वाली NCP और जगन मोहन रेड्डी भी पार्टी के कांग्रेस में विलय की अटकलें तेज हो गई हैं. इस तरह के किसी भी विलय का राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने समर्थन किया है.

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तृणमूल ही नहीं...कांग्रेस में विलय कर 'घर वापसी' कर सकती हैं ये दो बड़ी पार्टियां, पर्दे के पीछे बातचीत की अटकलें तेज

NCP(SP) और YSRCP के कांग्रेस में विलय की अटकलें. (फोटो- ANI)

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नई दिल्ली: अभी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कांग्रेस में विलय की चर्चाओं पर विराम भी नहीं लगा था तब तक दो अन्य राजनीतिक दलों की भी 'घर वापसी' की भी अटकलें तेज हो गई हैं. विलय की चर्चा आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी और उनकी पार्टी युवाजना श्रमिका रायथू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) तथा शरद पवार की अगुवाई वाली NCP के बारे में भी हो रही है.

द स्टेट्समैन की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कांग्रेस नेतृत्व और YSRCP के बीच अनौपचारिक बातचीत और पर्दे के पीछे संपर्क हो रहे हैं. इससे किसी संभावित राजनीतिक समझौते या पुरानी पार्टी में 'घर वापसी' की अटकलें तेज हो गई हैं. हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष ने ऐसी किसी पहल की पुष्टि नहीं की है. 

जगन की बहन बन सकती हैं रोड़ा

वर्तमान में  आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) की कमान वाईएस शर्मिला के पास है. शर्मिला गन मोहन रेड्डी की बहन हैं और उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी का कांग्रेस में विलय कर लिया था. शर्मिला और जगन के संबंध अच्छे नहीं हैं इसलिए आंध्र प्रदेश में कांग्रेस और YSRCP का एक होना इतना आसान भी नहीं माना जा रहा. पारिवारिक राजनीतिक समीकरणों के कारण ये विलय खटाई में भी पड़ सकता है. बता दें कि ममता बनर्जी और शरद पवार की तरह ही, जगन मोहन रेड्डी भी पार्टी नेतृत्व से मतभेदों के चलते कांग्रेस से अलग हो गए थे. उन्होंने अपने पिता और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद 2011 में YSRCP की स्थापना की थी.

NCP(SP) को लेकर भी अटकलें

BJP के खिलाफ मजबूत लड़ाई के लिए शरद पवार की अगुवाई वाली NCP के भी कांग्रेस में विलय की संभावना पर चर्चा जारी है. NCP(SP) के पास महाराष्ट्र में इस समय 7 सांसद हैं. अगर  शरद पवार कांग्रेस में विलय का फैसला लेते हैं तो इससे राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस मजबूत होगी. हालांकि पार्टी नेता सुप्रिया सुले ने ऐसी किसी अटकल पर खुल कर जवाब नहीं दिया है. महाराष्ट्र कांग्रेस नेता नाना पटोले ने भी पहले संकेत दिया था कि इस संभावना पर चर्चा हुई थी लेकिन, इस मुद्दे पर कोई नई प्रगति नहीं हुई है.

कैसे शुरू हुई चर्चा?

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राऊत के एक सुझाव से इस चर्चा की शुरुआत हुई. संजय राऊत ने कहा कि कांग्रेस से निकली क्षेत्रीय पार्टियों को पार्टी में फिर से शामिल हो जाना चाहिए और राहुल गांधी के नेतृत्व का मिलकर समर्थन करना चाहिए. इस बयान का समर्थन राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी किया है. गहलोत ने कहा है कि संजय राऊत की बात में दम है. अब लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ने का समय आ गया है. गहलोत ने कहा है कि जो पार्टियां कांग्रेस से अलग होकर बनी थीं, उन्हें फिर से साथ आने पर विचार करना चाहिए और पूरे दिल से राहुल गांधी को अपना नेता स्वीकार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन को देश के सामने एक साफ और स्पष्ट नेतृत्व वाला चेहरा पेश करना चाहिए. 

विलय की अटकलों पर टीएमसी के बागी दल ने क्या कहा?

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने इन चर्चाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अभी हमारे पास 64 विधायक है और आगे ये संख्या बढ़ेगी, लेकिन कोई भी कांग्रेस में शामिल होने वाले नहीं है. ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि लोकसभा के बीस सांसद नहीं जा रहे हैं. राज्यसभा के कुछ सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं और और भी इस्तीफा देंगे. 64 विधायक भी कांग्रेस के साथ नहीं जा रहे हैं. जहां तक मुझे मालूम है, नगरपालिकाएं भी नहीं जाएंगी, जिला परिषद भी नहीं जाएगा. तो फिर कौन जाएगा? हम लोग कांग्रेस के साथ जाने का कोई सवाल ही नहीं है. 

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