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NALSAR के बाद अब इस टॉप लॉ कॉलेज में CJI सूर्यकांत को इनवाइट करने का विरोध, क्या है वजह? 

हैदराबाद स्थित टॉप लॉ यूनिवर्सिटी में विवाद तब शुरू हुआ था, जब ग्रेजुएट होने वाले छात्रों ने यूनिवर्सिटी के उस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने की बात कही गई थी.

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NALSAR के बाद अब इस टॉप लॉ कॉलेज में CJI सूर्यकांत को इनवाइट करने का विरोध, क्या है वजह? 

NLSIU में चीफ जस्टिस को इनवाइट करने का विरोध

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  • NALSAR के बाद अब NLSIU के छात्रों ने CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में बुलाने का विरोध किया है. 
  • NLSIU के छात्रों ने चिट्ठी लिखकर NALSAR के छात्रों के साथ एकजुटता दिखाई है. 
  • पिछले साल NLSIU के दीक्षांत समारोह में जस्टिस सूर्यकांत और मनन कुमार मिश्रा शामिल हुए थे.

हैदराबाद के नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने का विरोध हुआ था. इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने आदेश दिया था कि 2026 बैच के छात्रों को अधिवक्ताओं के रूप में रजिस्टर्ड नहीं कराया जाएगा. इसका जमकर विरोध हुआ और बाद में बीसीआई ने इस आदेश को वापस ले लिया. अब देश के टॉप लॉ कॉलेज में से एक बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के छात्रों और पूर्व छात्रों ने दीक्षांत समारोह में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को आमंत्रित किए जाने का विरोध किया है. 

NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने शनिवार को लिखी एक चिट्ठी में कहा कि वे NALSAR के छात्रों के साथ बिना शर्त एकजुटता के साथ खड़े हैं. उन्होंने बीसीआई अध्यक्ष मनन मिश्रा के आचरण और चीफ जस्टिस द्वारा अपने खुद के दीक्षांत समारोह में प्रस्तावित भागीदारी दोनों की आलोचना की. छात्रों ने कहा कि मुद्दा केवल इस बारे में नहीं है कि समारोह में कौन भाग लेता है, बल्कि यह है कि भारत के प्रमुख लॉ यूनिवर्सिटीज के छात्रों को अपने पेशेवर भविष्य के लिए परिणामों के डर के बिना शक्तिशाली संस्थानों और सार्वजनिक अधिकारियों से असहमत होने की स्वतंत्रता होनी चाहिए.

NLSIU के छात्रों ने NALSAR के छात्रों को लिखी चिट्ठी

बयान में कहा गया है, 'हम NALSAR में अपने साथी छात्रों के साथ बिना शर्त एकजुटता से खड़े हैं, जिन्होंने सत्ता के सामने सच बोलने में साहस और नैतिक दृढ़ विश्वास दिखाया है.' NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने बीसीआई से NALSAR के छात्र और संकाय समुदाय से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है. उन्होंने बीसीआई पर छात्रों के बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. इतना ही नहीं NLSIU के छात्रों ने बीसीआई से यह स्पष्टीकरण देने की भी मांग की कि विवादास्पद आदेश के संबंध में उसके अध्यक्ष द्वारा उसके आधिकारिक लेटरहेड का इस्तेमाल कैसे किया गया.

NLSIU और बीसीआई का विश्वविद्यालय की गवर्निंग बॉडी के साथ संबंध रहा है, जिसमें भारत के चीफ जस्टिस और बीसीआई अध्यक्ष दोनों ही शामिल हैं. NLSIU के 2025 के दीक्षांत समारोह में सीजेआई सूर्यकांत (तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट के जज) ने समारोह की अध्यक्षता की थी, जबकि मनन मिश्रा ने स्वागत भाषण दिया था. 
 
NALSAR विवाद क्या था?

हैदराबाद स्थित टॉप लॉ यूनिवर्सिटी में विवाद तब शुरू हुआ था, जब ग्रेजुएट होने वाले छात्रों ने यूनिवर्सिटी के उस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने की बात कही गई थी. छात्रों को आपत्ति इस बात से थी कि जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुआ था. उसमें दिल्ली पुलिस और आरएएफ की ओर से लाठीचार्ज किया गया था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की थी- 'हमारा समय बर्बाद ना करें.' हालांकि बाद में चीफ जस्टिस ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि  उन्होंने याचिका पर सुनवाई से इनकार नहीं किया था, बल्कि इसे उचित तरीके से दायर करने के लिए कहा था.

बार काउंसिल ने क्या दिया था आदेश

इसके बाद बीजेपी के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली बार काउंसिस ने एक आदेश जारी किया, जिसमें अगले निर्देश तक NALSAR के 2026 के ग्रेजुएट बैच के छात्रों का रजिस्ट्रेशन ना करें. इस आदेश में तर्क दिया गया कि कानून के जिन छात्रों ने देश के सर्वोच्च न्यायिक पद के प्रति कोई सम्मान या आदर नहीं दिखाया, उससे जिम्मेदार या समझदार वकील, शिक्षक या न्यायाधीश बनने की उम्मीद नहीं की जा सकती. इसी के बाद तुरंत विवाद खड़ा हो गया. आदेश जारी करने के कुछ ही घंटों बाद बीसीआई ने इस आदेश को वापस ले लिया था. 

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