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दिल्ली में पीजी को लेकर दिल्ली नगर निगम की ओर से किए गए सर्वे में कई चौकानें वाली बातें सामने आई हैं, जो सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है. सबसे बड़ी बात है कि दिल्ली में संचालित 99 फीसदी पीजी के पास फायर एनओसी ही नहीं है.
दिल्ली में सत्य निकेतन पीजी हादसे के बाद एमसीडी के सर्वे में बड़ा खुलासा हुआ है. सर्वे के अनुसार ज्यादातर पीजी में नियमों का पालन नहीं हो रहा है और उनका संचालन बिना किसी मानक के किया जा रहा है. करीब 90 फीसदी पीजी के पास फायर एनओसी नहीं है. वहीं 30% के पास लेआउट अप्रूवल ही नहीं है. आइए जानते हैं कि सर्वे में पीजी को लेकर क्या-क्या खुलासे हुए हैं.
MCD ने दिल्ली के सभी 12 जोन में कुल 2453 पीजी का सर्वे किया. इनमें से सिर्फ 31 पीजी( करीब 1.2 प्रतिशत) के पास ही फायर एनओसी पाई गई. वहीं, सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सर्वे में शामिल सिर्फ 8 इमारतों के पास स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट मिला.
सत्य निकेतन हादसे के अगले दिन, 7 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में PG और अन्य आवासीय इमारतों में सुरक्षा मानकों को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाई थी. इसके बाद MCD ने अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और PG का सर्वे कराया.
सर्वे में बिल्डिंग प्लान की मंजूरी, फायर सेफ्टी, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OCC), रेगुलराइजेशन और दिल्ली मास्टर प्लान (MPD) के तहत PG के रूप में इस्तेमाल की अनुमति समेत कई बिंदुओं की जांच की गई.
12 जोन में किए गए इस सर्वे में सिविल लाइन्स में सबसे ज्यादा PG मिले. यहां कुल 608 पीजी संचालित है. यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस के आसपास का प्रमुख क्षेत्र है. 608 में से सिर्फ 364 इमारतों के बिल्डिंग प्लान मंजूर थे.
केवल 28 के पास फायर NOC और 27 के पास रेगुलराइजेशन की मंजूरी सर्वे में मिली. सहीं बड़ी बात यह रही है कि इस दौरान किसी भी इमारत के पास स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट नहीं मिला.
सर्वे के अनुसार केशव पुरम जोन में 410 पीजी संचालित हैं, लेकिन इनमें से केवल 2 के पास ही फायर एनओसी मिली. वहीं सिर्फ 54 इमारतों के बिल्डिंग प्लान मंजूर पाए गए और दो के पास स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट था. किसी भी PG के पास ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं मिला.
साउथ जोन में संचालित पीजी की स्थिति और भी खराब है. इस इलाके में दिल्ली विश्वविद्यालय का साउथ कैंपस, IIT दिल्ली और JNU जैसे बड़े संस्थान हैं. इसके बावजूद यहां सर्वे की गई 390 पीजी में से किसी के पास फायर एनओसी, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट, मंजूर बिल्डिंग प्लान या OCC नहीं मिला. इतना ही नहीं किसी भी प्रॉपर्टी को दिल्ली मास्टर प्लान के तहत PG के लिए मंजूरी मिली हुई नहीं है.
फायर NOC उस बिल्डिंग को दिया जाता है, जहां उसके इस्तेमाल के मुताबिक आग से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं. इसमें इमरजेंसी एग्जिट, आने-जाने के रास्ते, फायर फाइटिंग उपकरण और आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने जैसी व्यवस्थाएं शामिल होती हैं.
किसी भी बिल्डिंग का स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट यह प्रमाणित करता है कि बिल्डिंग का ढांचा उसके निर्माण और उपयोग के दौरान पड़ने वाले भार और दबाव को सुरक्षित तरीके से झेलने में सक्षम है.
हाईकोर्ट द्वारा तय सर्वे की समयसीमा समाप्त हो चुकी है. MCD ने सर्वे की अंतिम तारीख 10 सितंबर रखी थी, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक काम पूरा करने से पहले कम से कम एक दिन और सर्वे जारी रहने की संभावना है.