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यह माना जाता है कि जब इंसान की परछाई साथ छोड़ दे, तो वह मृत्यु का संकेत होता है. लेकिन मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक अनोखी जगह है, जहां हर साल कुछ क्षणों के लिए परछाई खुद-ब-खुद गायब हो जाती है और ये किसी डर की नहीं, बल्कि प्रकृति और विज्ञान की अद्भुत घटना का हिस्सा है.
कहा जाता है कि जब इंसान की परछाई उसका साथ छोड़ दे, तो वह मृत्यु का संकेत माना जाता है. लेकिन मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक ऐसी जगह है, जहां हर साल कुछ पल के लिए परछाई गायब हो जाती है और वह भी बिना किसी डर या अंधविश्वास के. यह जगह आज के समय में एक अनोखा सेल्फी प्वाइंट बन चुकी है, जिसे लोग 'नो शैडो जोन' के नाम से जानते हैं.
क्या है ‘नो शैडो जोन’?
ये स्थान कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर स्थित है, जो भारत में मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के दीवानगंज और सलामतपुर के बीच से होकर गुजरती है. हर साल 21 जून को, दोपहर 12 बजे, यहां सूर्य की किरणें ठीक 90 डिग्री के कोण से धरती पर गिरती हैं. इस कारण, खड़े व्यक्ति की परछाई जमीन पर नहीं पड़ती, वह पूरी तरह गायब हो जाती है. यही कारण है कि इसे 'नो शैडो जोन' कहा जाता है.
भूगोल से विज्ञान तक का सफर
हमने स्कूल में ‘कर्क रेखा’ के बारे में भूगोल की किताबों में पढ़ा और ग्लोब पर देखा है, लेकिन उसे स्वयं के अनुभव में देखना एक रोमांचक एहसास है. यह रेखा मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 25 किलोमीटर दूर, "स्टेट हाइवे-18" पर स्थित है.
पर्यटन और अनुभव
ये स्थान अब लोगों के लिए सिर्फ एक भूगोल की रेखा नहीं, बल्कि अनुभव करने योग्य विज्ञान का उदाहरण बन चुका है. हर साल यहां बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और इस अनोखी घटना का साक्षी बनते हैं. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उनकी पत्नी और प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु, जग्गी वासुदेव (सद्गुरु) भी इस स्थान का दौरा कर चुके हैं.