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क्या है भारत-म्यांमार-थाईलैंड हाईवे प्रोजेक्ट? 1,360 किलोमीटर लंबी सड़क कैसे इंडिया को साउथ-ईस्ट एशिया से जोड़ेगी, जानिए सबकुछ

IMT Highway: आसियान देश भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक हैं. थाइलैंड तक पहुंच देने वाला ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए बेहद अहम है. इसके पूरा होने के बाद एक बड़ा आर्थिक कॉरिडोर बनेगा जो दक्षिण एशिया को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ेगा.

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क्या है भारत-म्यांमार-थाईलैंड हाईवे प्रोजेक्ट? 1,360 किलोमीटर लंबी सड़क कैसे इंडिया को साउथ-ईस्ट एशिया से जोड़ेगी, जानिए सबकुछ

IMT हाईवे भारत को सीधे दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजार तक पहुंच प्रदान करेगा. (AI इमेज)

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  • भारत के मणिपुर से शुरू होकर थाइलैंड के माए सोट शहर तक जाता है IMT हाईवे
  • IMT हाईवे का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है
  • IMT हाईवे भारत को सीधे दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजार तक पहुंच प्रदान करेगा

India-Myanmar-Thailand Trilateral Highway: भारत एक ऐसा हाईवे बना रहा है जो देश को सीधे साउथ-ईस्ट एशिया से जोड़ेगा. 1,360 किलोमीटर लंबा, चार लेन वाला ये सड़क मार्ग भारत की 'लुक ईस्ट पॉलिसी' के तहत बनाया जा रहा है. इसे भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय हाईवे या IMT हाईवे के नाम से जाना जाता है. IMT हाईवे भारत के लिए आर्थिक और रणीतिक रूप से कितना अहम है, आइये जानते हैं. 

कहां से शुरू और कहां समाप्त होगा IMT हाईवे?

1,360 किलोमीटर लंबा ये अहम हाइवे भारत के मणिपुर राज्य में मोरे से शुरू होता है और म्यांमार से होते हुए थाईलैंड के माए सोट शहर जाकर समाप्त होता है. इस हाईवे के निर्माण का मुख्य उद्देश्य भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच व्यापार, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देना है. यह भारत के सबसे बड़े क्रॉस-बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है. 

आसियान (ASEAN) देशों के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने के लिए इस परियोजना को दो दशक से भी पहले सोचा गया था. म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता और सशस्त्र संघर्ष के कारण भारत के नॉर्थ-ईस्ट को एक आसान सड़क नेटवर्क के जरिए साउथ-ईस्ट एशिया से जोड़ने वाला ये हाईवे प्रोजेक्ट काफी लेट भी हुआ है. हालांकि मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट ये बताती है कि अब IMT हाईवे का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है.

मणिपुर के मोरे से शुरू होने के बाद ये हाईवे म्यांमार के तामू, कालेवा, मांडले और नेपीडा जैसे प्रमुख शहरों से होकर गुजरता है. इसके बाद थाईलैंड में प्रवेश करता है. इस प्रोजेक्ट की योजना 2002 में बनाई गई थी और शुरू में इसके 2015 तक पूरा होने की उम्मीद थी. अब इसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. 

म्यांमार के हिस्से का पैसा दे रहा भारत

भारत के लिए ये प्रोजेक्ट कितना अहम है इसे इससे समझा जा सकता है कि भारत इस परियोजना के तहत म्यांमार में दो प्रमुख हिस्सों के निर्माण और अपग्रेडेशन का वित्तपोषण कर रहा है. भारत 120 किमी लंबे कलेवा-यग्गी खंड का निर्माण भी कर रहा है जो पहाड़ी और घुमावदार क्षेत्र है. इसे 4-लेन में अपग्रेड किया जा रहा है. 150 किलोमीटर लंबे तमू-क्यीगोन-कलेवा खंड का वित्तपोषण एवं निर्माण भी भारत कर रहा है. इस 150 किमी के रास्ते में दूसरे विश्वयुद्ध के समय के 69 पुराने पुल हैं जिन्हें नए सिरे बनाया जा रहा है. इसके साथ संपर्क मार्गों का निर्माण भी किया जा रहा है. 

IMT हाईवे से भारत को क्या फायदा होगा?

म्यांमार एकमात्र आसियान देश है जो भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करता है. IMT हाईवे भारत को सीधे दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजार तक पहुंच प्रदान करेगा. एक बार पूरा हो जाने के बाद ये सड़कमार्ग मणिपुर, मिजोरम, असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए यह आर्थिक विकास और व्यापार के नए द्वार खोलेगा. भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र चारों तरफ से जमीन से घिरा हुआ है. IMT हाईवे से इस क्षेत्र को थाईलैंड और आसियान के दूसरे बाजारों तक सीधी सड़क कनेक्टिविटी मिल जाएगी. भारत को उम्मीद है कि आगे चलकर इस कॉरिडोर को कंबोडिया, लाओस और वियतनाम तक बढ़ाया जाएगा. इस तरह  पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में सड़क के जरिए कनेक्टिविटी का एक बड़ा नेटवर्क बन सकेगा.

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