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Link-3 Project: केंद्र सरकार चिनाब नदी के पानी को भारत के हित में इस्तेमाल करने के लिए एक बड़ी परियोजना शुरू करने जा रही है. केंद्र सरकार ने टनल बनाकर चिनाब नदी के पानी को मोड़ने का फैसला किया है जिसे ब्यास नदी में मिलाया जाएगा. पाकिस्तान इस योजना को सुनकर बौखलाया हुआ है.
Chenab–Beas tunnel Project: सिंधु जल संधि स्थगित होने के बाद से ही भारत ने नदियों पर बांधों और हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट जैसी कई परियोनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया है. अब भारत की तरफ से एक ऐसी महात्वांकांक्षी परियोजना शुरू करने की घोषणा की गई है जिससे पाकिस्तान में चीख-पुकार मच गई है. भारत ने चिनाब नदी का अतिरिक्त पानी भारत की धरती पर मोड़ने का फैसला किया है. इसके लिए पहाड़ों के बीच सुरंग बनाकर चिनाब बेसिन से अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी की ओर मोड़ा जाएगा.
चिनाब-ब्यास लिंक प्रोजेक्ट एक ऐसी इंफ्रास्ट्रक्चर योजना है जिससे भारत के एक बड़े हिस्से में पानी की कमी की समस्या दूर हो सकती है. भारत सरकार ने इसके लिए हिमाचल प्रदेश में लगभग 2,532 करोड़ रुपये की लागत से ऐसी परियोजना शुरू करने की घोषणा की है जिसमें 8.7 किलोमीटर लंबी टनल के माध्यम से चिनाब का पानी ब्यास नदी में लाया जाएगा. चिनाब, सिंधु नदी प्रणाली की एक अहम नदी है और यह पाकिस्तान में भी बहती है.
इस परियोजना को 'लिंक-3 प्रोजेक्ट' भी कहा जा रहा है. ओपेन सोर्स डेटा से इस प्रोजेक्ट के बारे में मिली जानकारी के अनुसार, परियोजना के पहले चरण में चंद्रा नदी पर 19 मीटर ऊंचा बैराज भी बनाया जाएगा. ये जगह हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में कोक्सर गांव के पास है. 19 मीटर ऊंचा ये कंक्रीट बैराज 10,300 फीट की ऊंचाई पर बनाया जाएगा. केंद्र सरकार इस साल 1 अगस्त से परियोजना पर काम शुरू करने की तैयारी में है और इसे पूरा करने का लक्ष्य 31 जुलाई, 2029 तय किया गया है.
भारत के चिनाब-ब्यास लिंक प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी जैसे ही मीडिया में आई, पड़ोसी पाकिस्तान में खलबली मच गई. पाकिस्तान ने इसे सिंधु जल संधि का उल्लंघन बताया है. पाकिस्तान को डर है कि इससे चिनाब नदी के बहाव पर असर पड़ेगा और उसकी खेती-किसानी बर्बाद हो जाएगी. हालांकि 'लिंक-3 प्रोजेक्ट' के माध्यम से भारत चिनाब में बहने वाला सिर्फ अपने हिस्से का पानी ही ब्यास में मोड़ रहा है.
सिंधु जल संधि के तहत, पाकिस्तान को इस प्रणाली की तीन पश्चिमी नदियों, चिनाब, झेलम और सिंधु से आने पानी का ज्यादातर हिस्सा मिला था. बकि भारत को तीन पूर्वी नदियों, सतलुज, ब्यास और रावी पर पूर्ण अधिकार प्राप्त था. हालांकि, पाकिस्तान ने इस संधि की आड़ में हमेशा भारत की विकास परियोजनाओं में रोड़े ही अटकाए. अब भारत संधि स्थगित होने के बाद पाकिस्तान से किसी भी तरह की एनओसी लेने के लिए बाध्य नहीं है.
बता दें कि चिनाब-ब्यास लिंक प्रोजेक्ट नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) द्वारा शुरू की जा रही है. यह हिमाचल प्रदेश में 4,000 मेगावाट अतिरिक्त जलविद्युत भी उत्पन्न करेगा. भारत ने बहुत पहले ही ये साफ कर दिया था कि उसे अपने पास मौजूद जल संसाधनों का पूरा इस्तेमाल करने का अधिकार है. हालांकि इस परियोजना को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह भी दी है. जिस इलाके में ये सुरंग बन रही है वह आपदा की दृष्टि से सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक माना जाता है. विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि परियोजना को शुरू करने से पहले पूरी तरह से शोध कर लेना चाहिए.