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Russia-Ukraine War ने बिगाड़ा सरकार का बजट, राजकोषीय घाटा हो सकता है 20 लाख करोड़ पार

रूस और यूक्रेन युद्ध का असर केंद्र सरकार के बजट पर पड़ा है. राजकोषीय घाटा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. पढ़ें अभिषेक सांख्यान की रिपोर्ट.

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Russia-Ukraine War ने बिगाड़ा सरकार का बजट, राजकोषीय घाटा हो सकता है 20 लाख करोड़ पार

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण. (फाइल फोटो-PTI)

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डीएनए हिंदी: केंद्र सरकार (Modi Government) 21 मई को पेट्रोल और डीजल (Petrol-Diesel) पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कमी की है. वितमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने  बढ़ती महंगाई पर अंकुश लगाने की कोशिश की है. 

अर्थव्यवस्था को लेकर लेकिन सरकार की चिंताए अभी खत्म नहीं हुई हैं. उत्पाद शुल्क में कमी, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और उर्वरक (Fertilizer) के बढ़े हुए दामों से सरकार की झोली पर करीब 3 लाख करोड़ रुपए का भार पड़ा है.  

20 लाख करोड़ पहुंच सकता है राजकोषीय घाटा 

सरकार ने अपने प्रस्तावित बजट  में वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए 260 लाख करोड़ की GDP का अनुमान लगाया था. वहीं राजकोषीय घाटे (की बात करें तो 16.61 लाख करोड का दर्शाया गया था. वित्त वर्ष के दो महीनों के भीतर ही सरकार पर  3 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आ गया है. 

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देश का राजकोषीय घाटा 19.57 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. ऐसे में अगर सरकार विकास कार्यों (Development Works) पर अपने खर्चे कम नहीं करती तो सरकार को बाजार से और कर्ज लेना पड़ेगा. 

वित्तीय वर्ष 2022-23
वित्तीय वर्ष.

 

PM गरीब कल्याण अन्न योजना पर 80,000 करोड़ रुपए खर्च

कोविड राहत (Covid Relief) के तौर पर शुरु की गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) को सरकार ने बजट की घोषणा के वक्त अगले वित्त वर्ष (Financial Year) के लिए जारी नहीं रखने का फैसला किया था. यूपी चुनावों के नतीजों के बाद सरकार ने योजना को मौजूदा वित्त वर्ष 2022-23 में भी अगले 6 महीनों के लिए जारी रखने का घोषणा कर दी.

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पहले बजट में  2.06 लाख करोड़ की खाद्य सब्सिडी का प्रावधान किया गया था. मगर  PMGKAY योजना से जारी रखने सरकार पर 80000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा. अगर महंगाई खास तौर पर खाद्य पदार्थों की मंहगाई में कमी नहीं आती है तो इस सब्सिडी को सितंबर के बाद भी जारी रखा जा सकता है.

बढ़ेगा राजकोषीय घाटा.


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उत्पाद शुक्ल में कमी

पिछले साल नवम्बर, 2021 में सरकार ने पेट्रोल और डीजल एक्साइज ड्यूटी में 5 और 10 रुपये की कमी की थी. इस साल बजट में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी से अपनी आय का उसी अनुरुप कम अनुमान भी लगाया था. 21 मई को सरकार ने पेट्रोल पर 8 रुपये और डीजल पर 6 रुपये एक्साइज ड्यूटी कम करने का ऐलान किया है. वितमंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि इससे इससे सरकार पर 1 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ेगा.

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