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UP Election 2027:कभी 'चवन्नी' और 'खीर' वाले बयानों से यूपी की सियासत में बदलाव करने वाले जयंत चौधरी ने यूपी विधानसभा चुनावों के लिए हुंकार भर दी है. सपा के गढ़ मुरादाबाद जिले में बुलडोजर के साथ वह उतरे. मुस्लिमों के साथ की राजनीति करने वाले जयंत क्या इस बार उनके धुर विरोधी नजर आने वाले है?
UP Election 2027: यूपी के विधानसभा इलेक्शन भले ही अभी महीनों दूर हों लेकिन राज्य की सियासत के इस सबसे बड़े समर में सभी खिलाड़ी अपने -अपने तरीके से उतर रहे हैं. बिजनौर में जहां आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के चीफ चंद्रशेखर आजाद रैली कर रहे हैं और मुस्लिमों को साथ लेकर चल रहे हैं. वहीं, मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में राष्ट्रीय लोक दल के चीफ और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी बुलडोजर के साथ उतरे. ऐसे में इस बार के विधानसभा चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कभी समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के साथ रहे जयंत चौधरी इस बार उनके विरोध में कौन सा तरीका अपनाते हैं.
दरअसल, समाजवादी पार्टी के मजबूत किले माने जाने वाले मुरादाबाद से जयंत चौधरी ने आरएलडी के चुनावी अभियान का आगाज किया. मुरादाबाद को सपा का गढ़ माना जाता है जहां बीजेपी के सहयोगी आरएलडी की अब नजर है. जयंत चौधरी अब सपा के मजबूत इलाके में आरएलडी के लिए सियासी जमीन तैयार करने उतरे रहे हैं. इस मुस्लिम बहुल इलाके में विधानसभा की 6 सीटें हैं. पिछले विधानसभा चुनावों में 6 में से 5 सीट सपा और एक सीट बीजेपी ने जीती थी. इतना ही नहीं, मुरादाबाद लोकसभा सीट भी सपा के खाते में ही गई थी.
देश के पीएम रहे चौधरी चरण सिंह के पोते और बीजेपी के साथ रहे अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी का असर वैसे तो पश्चिमी यूपी में ज्यादा है. जाट और किसानों की राजनीति को अपना हथियार मानने वाले जयंत चौधरी का असर बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ और बिजनौर जैसे जाट बहुल इलाकों तक माना जाता था लेकिन अब वह इस दायरे को तोड़कर मुस्लिम बहुल मुरादाबाद में अपनी जड़ों को बढ़ाने के लिए तैयारी कर रहे हैं.
अमेरिका में जन्मे और विदेश से ही पढ़ाई करके आए जयंत चौधरी देसी अंदाज में राजनीति की बागडोर संभाल रहे हैं. उनके कई बयान भी चर्चा का विषय रहते हैं. जब वह अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आजाद के साथ थे तो वह यूपी में विपक्ष की राजनीति करते थे. एक बाद अमित शाह ने कहा था कि जयंत के पिता अजीत सिंह उनके साथ थे, उनके बेटे जयंत भी उनके साथ होंगे. तब जयंत चौधरी ने कहा था कि वह चवन्नी नहीं है जो पलट जाएंगे. सपा ने उनको राज्यसभा भी भिजवाया था. बाद में जब मुजफ्फर नगर की लोकसभा सीट के कैंडिडेट को लेकर अखिलेश यादव से बात बिगड़ी तो उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा कि कोई कुछ भी खा सकता है, उन्हें खीर पसंद है. उसके बाद वह विपक्ष का साथ छोड़कर सत्ता पक्ष के साथ चले गए. इस गठबंधन से आरएलडी के तो दो सांसद बन गए लेकिन बीजेपी को यूपी में लोकसभा सीटों का तगड़ा नुकसान हुआ. अब इस बार देखने वाली बात होगी कि बीजेपी और आरएलडी में किस तरह की केमिस्ट्री रहती है.
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