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चीन के लिए बुरा सपना होगी भारत की LR-AShM, रेंज बढ़ाकर 3,500 किलोमीटर करेगा DRDO, जानें कैसे बनेगी गेम चेंजर

अगर लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल की मारक क्षमता बढ़ाकर 3500 किमी कर दी जाती है तो ये तटीय सुरक्षा उपकरण से बदलकर एक रणनीतिक हथियार बन जाएगी. इसे आसानी से कहीं भी तैनात किया जा सकता है.

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चीन के लिए बुरा सपना होगी भारत की LR-AShM, रेंज बढ़ाकर 3,500 किलोमीटर करेगा DRDO, जानें कैसे बनेगी गेम चेंजर

LR-AShM बेहद ताकतवर एंटी शिप मिसाइल है. (AI इमेज)

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  • LR-AShM का विकास एयरक्राफ्ट किलर हथियार के रूप में किया गया है
  • लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल की मौजूदा रेंज 1500 किमी है
  • इस मिसाइल में कई तरह के पारंपरिक वॉरहेड ले जाने की सुविधा है

Long-Range Anti-Ship Hypersonic Missile: दुनिया में ऐसे बहुत कम देश हैं जो समुद्र में दुश्मन के युद्धपोतों और एयरक्राफ्ट करियर को 1000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी से निशाना बना सकते हैं. इन खास देशों की सूची में भारत भी शामिल है. भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने एक ऐसी लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित कर ली है जो  1,500 किलोमीटर दूर तक हमला कर सकती है. भारत के दुश्मनों के लिए बुरी खबर ये है कि DRDO अब इस मिसाइल की रेंज को बढ़ाकर  3,500 किलोमीटर करने की तैयारी कर रहा है. आइये जानते हैं कि LR-AShM क्या है और इसकी रेंज को 3,500 किलोमीटर तक बढ़ाने के क्या मायने हैं. 

क्यों चीन के लिए बुरा सपना है LR-AShM?

लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल का विकास एक एयरक्राफ्ट किलर हथियार के रूप में किया गया है. इस मिसाइल को पहली बार दुनिया ने 26 जनवरी 2026 को देखा था. अभी इस मिसाइल की रेंज 1500 किमी है. इसे भारतीय नौसेना के लिए तटीय सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में दुश्मन के बड़े युद्धपोतों व एयरक्राफ्ट कैरियर्स को लंबी दूरी से नष्ट करने के मुख्य उद्देश्य से तैयार किया गया है. LR-AShM को अभी पूरी तरह कोस्टल बैटरी के रूप में तैनात नहीं किया गया है. 

अगर लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल की रेंज बढ़ाकर 3500 किमी कर दी जाती है तो ये तटीय सुरक्षा उपकरण से बदलकर एक रणनीतिक हथियार बन जाएगी. रक्षा मामलों की वेबसाइट डिफेंस डॉट इन के अनुसार, बढ़ी हुई रेंज वाला मॉडल LR-AShM की मौजूदा हाइपरसोनिक बूस्ट-ग्लाइड टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा. DRDO ने बेस लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल को स्थिर लक्ष्यों और  चलते हुए जहाजों, दोनों को सटीक रूप से निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया है. इस मिसाइल में कई तरह के पारंपरिक वॉरहेड ले जाने की सुविधा है.

LR-AShM की ताकत और खासियत

भारत की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल एक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल है. लॉन्च के दौरान इसकी अधिकतम गति 10 मैक की होती है.  ग्लाइड फेज के दौरान यह औसतन 5 मैक की स्पीड से लक्ष्य पर हमला करती है. LR-AShM की लंबाई लगभग 13 मीटर, व्यास 1.4 मीटर और कुल वजन 12 टन है. इसमें टू-स्टेज सॉलिड फ्यूल रॉकेट मोटर का उपयोग किया गया है.

LR-AShM को रोकना कितना मुश्किल?

पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों का रास्ता तय होता है, लेकिन LR-AShM रॉकेट बूस्टर का इस्तेमाल करके पहले ऊपरी वायुमंडल में पहुंचती है. इसके बाद ये रॉकेट बूस्टर से अलग हो जाती है और ग्लाइडर हवा में 'स्कीपिंग'  करते हुए और दिशा बदलते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ता है. यह कम ऊंचाई पर अत्यधिक तेज गति से उड़ान भरती है और हवा में पैंतरेबाजी भी करती है. इस वजह से दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम या युद्धपोतों पर लगे रडार इसे समय रहते डिटेक्ट या इंटरसेप्ट नहीं कर पाते. टर्मिनल फेज में समुद्र में चल रहे युद्धपोतों तक पहुंचने के लिए  इसमें स्वदेशी X-बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार और एडवांस रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर लगाया गया है. 

क्यों LR-AShM भारत के लिए सबसे अहम हथियार है?

भारत के पास पहले से ही ब्रह्मोस के रूप में एक घातक और बेहद ताकतवर एंटी शिप मिसाइल है. लेकिन LR-AShM समंदर में भारत की ताकत को कई गुना बढ़ा देती है. यह मिसाइल समुद्र में तैरते विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर्स और डेस्ट्रॉयर जहाजों को पलक झपकते ही तबाह करने में सक्षम है. 1,500 किमी की रेंज के कारण भारतीय नौसेना अपनी सीमाओं के भीतर रहकर ही हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में प्रवेश करने वाले दुश्मन के किसी भी नौसैनिक बेड़े को बेअसर कर सकती है. LR-AShM को मोबाइल ट्रक-आधारित लॉन्चर से आसानी से फायर किया जा सकता है. भविष्य में इसके ऐसे वैरियंट भी विकसित किए जाएंगे जो युद्धपोतों पर फिट हो सकें. 

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