भारत
चीन के पास पहले से ही चेंगदू J-20 स्टील्थ विमानों का बड़ा बेड़ा है. पाकिस्तान भी चीनी मूल के J-35 स्टील्थ विमान हासिल करने की होड़ में है. इस चुनौती से निपटने के लिए भारत S-400 और Su-57 की सम्मिलित ताकत का इस्तेमाल कर सकता है.
India’s integrated air defence capability: चीन के पास मौजूद पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ लड़ाकू विमानों को भारत के लिए खतरा माना जाता है. अगर ये फाइटर जेट्स पाकिस्तान को भी मिल जाते हैं तो चुनौती दो गुनी हो जाएगी. लेकिन अगर भारत रूस से पांचवीं पीढ़ी के Su-57E लड़ाकू विमान लेता है तो S-400 ट्रायम्फ लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम के साथ मिलकर ये जोड़ी एक किल चेन बना सकती है.
इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने भारत को पुष्टि की है कि IAF के मौजूदा S-400 एयर डिफेंस सिस्टम Su-57E के साथ टारगेट डेटा शेयर करने में सक्षम होंगे. इससे एक नेटवर्क वाला किल चेन तैयार होगा जिसे दुश्मन के विमानों का पता लगाने और उन पर हमला करने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है.
भारत के पास पहले से ही S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम है. रूस लंबे समय से भारत को Su-57 लड़ाकू विमान की पेशकश भी कर रहा है. ये दोनों हथियार मिलकर एक किल चेन बना सकते हैं. दरअसल, एक 'किल चेन' वह पूरी प्रक्रिया होती है जिसमें दुश्मन के खतरे को ढूंढने, उसे ट्रैक करने और अंत में उसे नष्ट करने के चरण शामिल होते हैं. जब S-400 और Su-57E एक साथ जुड़ते हैं, तो वे एक एकीकृत नेटवर्क बनाते हैं.
दोनों प्लेटफॉर्म रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग के माध्यम से एक-दूसरे के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं. इससे दुश्मन का कोई भी स्टील्थ विमान इस जोड़ी से बच नहीं सकता. ये जोड़ी चीन के J-20 और J-35 लड़ाकू विमानों को भी ट्रैक कर सकती है.
अकेले Su-57 लड़ाकू विमान भले ही बहुत ताकतवर न हो लेकिन, S-400 के साथ मिलकर ये दुश्मन पर कहर ढा सकता है. S-400 का रडार बेहद शक्तिशाली है और यह 600 किमी की दूरी तक के हवाई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है. यह एंटी-स्टील्थ रडार से लैस है, जो कम रडार विजिबिलिटी (RCS) वाले स्टील्थ विमानों का पता लगाने में सक्षम है. जोड़ीदार के रूप में S-400 जमीन से हवाई लक्ष्यों की शुरुआती जानकारी जुटाएगा.
वहीं, Su-57 फाइटर हवा में रहते हुए S-400 से मिले डेटा को प्राप्त करेगा. यह एक स्टील्थ फाइटर है, इसलिए दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों के बीच सुरक्षित रूप से घुसपैठ कर सकता है. यह S-400 द्वारा भेजी गई लोकेशन पर जाकर दुश्मन के विमानों की सटीक स्थिति की पुष्टि करेगा और उन्हें हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से नष्ट कर देगा.
दरअसल, पारंपरिक रडार अक्सर आधुनिक 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ विमानों को पकड़ने में विफल रहते हैं. लेकिन जब S-400 के जमीनी रडार और Su-57 के एडवांस ऑनबोर्ड AESA रडार एक साथ काम करते हैं, तो वे दुश्मन के विमान को अलग-अलग कोणों से देख सकते हैं. इससे दुश्मन के स्टील्थ विमानों का रडार क्रॉस-सेक्शन कमजोर पड़ जाता है और वे आसानी से पकड़ में आ जाते हैं. S-400 और Su-57 के बीच डेटा ट्रांसफर की गति बहुत तेज होने के कारण दुश्मन को संभलने या भागने का मौका नहीं मिलता.