भारत
पारंपरिक युद्ध प्रणालियों को आधुनिक और घातक ड्रोन तकनीक के साथ जोड़कर भारत अपनी सीमाओं पर भविष्य के संघर्षों के लिए पूरी तरह तैयार हो रहा है.
भारतीय सेना ड्रोन वॉरफेयर के लिए तेजी से खुद को तैयार कर रही है. मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद से कई ऐसे कदम उठाए गए हैं जो सेना को भविष्य के युद्ध के लिए सशक्त बना रहे हैं. भारतीय सेना अपनी लगभग 385 इन्फैंट्री बटालियनों में 'अश्नि प्लाटून' शामिल कर रही है. इस प्लाटून का काम अग्रिम मोर्चे पर ड्रोन युद्ध को नियंत्रित करना होगा. प्रत्येक 'अश्नि प्लाटून' के पास दस ड्रोन होंगे, जिनमें चार निगरानी के लिए और छह कामिकेज लोइटरिंग म्यूनिशन होंगे जो हमले के काम आएंगे. आइये जानते हैं सेना की तैयारियों के बारे में.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने कई सुधार लागू किए जिसमें 'अश्नि प्लाटून' का गठन भी शामिल था. इसके तहत अब फ्रंटलाइन कंपनी कमांडर को स्ट्राइक के लिए हाई कमान से संपर्क करने की जरूरत नहीं रहेगी. वे अग्रिम मोर्चे से ही अपने क्ष्य को देख सकते हैं और नष्ट कर सकते हैं.
इसी तरह बख्तरबंद कोर के लिए 'शौर्य स्क्वाड्रन' का गठन किया गया है. इसे आधुनिक युद्ध के हालात में रियल-टाइम निगरानी और सटीक हमले की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए बनाया गया है. शौर्य स्क्वाड्रन, आर्मर्ड रेजिमेंट के अंदर खास तौर पर ड्रोन के लिए बनी सब-यूनिट है. हर 'शौर्य स्क्वाड्रन' में लगभग 20-30 ट्रेंड जवान होते हैं जो ड्रोन ऑपरेट करने में माहिर होते हैं.
भारतीय सेना 'शौर्य स्क्वाड्रन' के माध्यम से बिना पायलट वाले हवाई वाहनों को सीधे मुख्य युद्धक टैंकों के साथ जोड़ रही है. 'एक्सरसाइज अमोघ ज्वाला' के दौरान इन नई स्क्वाड्रन्स की ऑपरेशनल तैयारी का प्रदर्शन भी किया जा चुका है. शौर्य स्क्वाड्रन के ट्रेंड जवान युद्धक्षेत्र में 10 से 20 किमी आगे की लाइव फीड टैंकों और लड़ाकू हेलीकॉप्टरों तक पहुंचाते हैं. इससे दुश्मन की पोजिशन के हिसाब से रणनीति बनाने में मदद मिलती है.
सेना ने आर्टिलरी रेजिमेंट में भी स्पेशल 'दिव्यास्त्र बैटरी' और शक्तिबान रेजिमेंट का गठन किया है. शक्तिबान रेजिमेंट को तोपों के अलावा ड्रोन और 'लोइटर एम्युनिशन' से लैस किया जा रहा है. शक्तिबान रेजिमेंट सिर्फ 30 से 40 किमी तक हमला करने वाले गोले ही नहीं बल्कि 200 से 700 किलोमीटर तक हमला करने में सक्षम लोइटर एम्युनिशन से भी लैस होगी.
दिव्यास्त्र फायरिंग यूनिट्स को भी फॉर्मेशन में मौजूद आर्टिलरी के संसाधनों के साथ जोड़ा जा रहा है. दिव्यास्त्र बैटरी में UAV, निगरानी और हमला करने वाले ड्रोन शामिल हैं. ये बैटरी डिवीन लेवल पर उन आर्टिलरी फॉर्मेशन को दी जाएंगी जो ज्यादातर डिफेंसिव भूमिका में होते हैं. दिव्यास्त्र फायरिंग यूनिट्स निगरानी, टोह लेने, टारगेट पर हमला करने और हमले के बाद नुकसान का आकलन करने में सक्षम होंगी.