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Explainer: भारतीय वायु सेना का AN-32 कैसे हुआ हादसे का शिकार? 40 साल से भर रहा उड़ान, IAF के ट्रांसपोर्ट बेड़े की रीढ़

असम के जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के दौरान एएन-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के क्रैश होने से भारतीय वायुसेना के पांच कर्मियों की मौत हो गई है. यह विमान एक रूटीन उड़ान पर था. एक्सीडेंट की वजह का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

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Explainer: भारतीय वायु सेना का AN-32 कैसे हुआ हादसे का शिकार? 40 साल से भर रहा उड़ान, IAF के ट्रांसपोर्ट बेड़े की रीढ़

AN-32 परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त. (AI इमेज)

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AN-32 aircraft crashed: असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना के AN-32 परिवहन विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से पांच वायुसेना कर्मियों की मौत हो गई है. एयरफोर्स ने बताया है कि ये विमान 13 जून की सुबह करीब 10 बजे एक नियमित उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. मृतक कर्मियों की पहचान स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीर वायु दानिश आलम के रूप में हुई है. दुर्घटना में एक को-पायलट घायल भी हुआ है. 

कैसे हुआ हादसा?

शुरुआती जांच से पता चला है कि मिलिट्री बेस के अंदर लैंडिंग के बाद विमान में आग लग गई. इसके बाद एयरबेस के अंदर तुरंत इमरजेंसी कार्रवाई शुरू की गई. बेस पर मौजूद फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिशें शुरू की गईं. वायुसेना ने इस दुर्घटना के विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं. 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इस दुर्घटना के बारे में ANI से बात करते हुए, एयर मार्शल संजीव कपूर (रिटायर्ड) ने बताया कि AN-32 भारतीय वायु सेना का एक बहुत सुरक्षित विमान है जो पिछले 40 सालों से उड़ान भर रहा है. यह उत्तर में सियाचिन, लेह, लद्दाख और ड्रॉप ज़ोन में काम करने वाले ट्रांसपोर्ट बेड़े की रीढ़ रहा है. साथ ही, यह अंडमान और निकोबार में समुद्र के ऊपर और लक्षद्वीप और पोर्ट ब्लेयर जैसे हमारे द्वीपीय इलाकों में भी सेवाएं दे रहा है. यह दक्षिण-पश्चिमी एयर कमांड के रेगिस्तानी इलाकों में भी काम कर रहा है.

एयर मार्शल संजीव कपूर (रिटायर्ड) ने आगे बताया कि AN-32  ट्रांसपोर्ट विमान तटीय इलाकों में समुद्री अभियानों में भी शामिल रहा है. चाहे पैरा-ड्रॉपिंग हो, हमला हो, लोगों को सुरक्षित निकालना हो, स्पेशल ऑपरेशन हो या सामान्य कम्युनिकेशन. AN-32 ने  ने भारतीय वायु सेना के लिए हर कसौटी पर खुद को साबित किया है. पूर्व वायुसेना अधिकारी ने बताया कि भले ही ये पुराने हैं, लेकिन इनके बेड़े को अपग्रेड किया गया है और ये अच्छी हालत में हैं.

बता दें कि AN-32 एक ट्विन-इंजन वाला मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान है जिसका इस्तेमाल भारतीय वायु सेना ऊंचे पहाड़ी इलाकों और दूर-दराज के क्षेत्रों सहित विभिन्न इलाकों में लॉजिस्टिक्स, कार्गो ट्रांसपोर्टेशन और ऑपरेशनल सपोर्ट मिशन के लिए बड़े पैमाने पर करती है. 

पहले कब हादसे का शिकार हुआ है AN-32 विमान?

इससे पहले भी AN-32 विमान हादसे का शिकार हो चुके हैं. जून 2019 में जोरहाट वायुसेना स्टेशन से अरुणाचल प्रदेश के मेचुका के लिए उड़ान भरने वाला आईएएफ का एक एएन-32 विमान, लापता हो गया था. व्यापक खोज अभियान के बाद विमान का मलबा अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र में मिला और उसमें सवार सभी 13 कर्मियों को मृत घोषित कर दिया गया था.

वहीं जुलाई 2016 में, चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जा रहा एक अन्य एएन-32 विमान बंगाल की खाड़ी के ऊपर लापता हो गया था. विमान में 29 लोग सवार थे. भारत के सबसे बड़े खोज अभियानों में से एक चलाए जाने के बावजूद विमान कई वर्षों तक नहीं मिल सका और उसमें सवार सभी लोगों को मृत मान लिया गया. वर्ष 2024 में इस विमान से जुड़े मलबे की पहचान की गई.

AN-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की खासियत क्या है?

AN-32 दो सिंगल-शाफ्ट टर्बोप्रॉप इंजन वाला ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है. यह छोटे और कच्चे रनवे से भी उड़ान भर सकता है. An-32 विमान 7.5 टन तक कार्गो के साथ उड़ान भर सकता है. एक साथ 50 जवानों को ये सीमावर्ती इलाकों में भारी हथियारों के साथ पहुंचा सकता है. An-32 की अधिकतम स्पीड 530 किलोमीटर प्रति घंटा है. एक बार में यह 2500 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है. 

पूर्वोत्तर की दुर्घटनाएं वायुसेना के लिए चिंता!

इस साल पूर्वोत्तर भारत के मुश्किल इलाकों में उड़ान भरने के दौरान वायुसेना का ये दूसरा विमान हादसा है. इससे पहले 5 मार्च को असम से कार्बी आंगलोंग जिलें की पहाड़ियों में सुखोई Su-30MKI फाइटर जेट क्रैश होने से वायु सेना के दो पायलटों की मौत हो गई थी. इस सुखोई Su-30MKI ने जोरहाट एयर बेस से रूटीन उड़ान भरी थी. उड़ान के कुछ देर बाद ही ग्राउंड कंट्रोल से इसका संपर्क टूट गया था. 

AN-32 की फ्लीट बदलना चाहती है वायुसेना

भारतीय वायुसेना अपने पुराने AN-32 और आईएल-76 फ्लीट को बदलने वाली है. IAF अपनी एयरलिफ्ट क्षमताओं को आधुनिक बनाने के लिए 40 से 80 नए ट्रासपोर्ट विमान खरीदने की योजना बना रही है. वायुसेना ऐसे विमान अपने बेड़े में शामिल करना चाहती है जिनकी कार्गो क्षमता 18 से 30 टन के बीच हो. इस रेस में ब्राज़ील की एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर का KC-390 विमान जिसकी अधिकतम पेलोड क्षमता लगभग 26 टन है, अमेरिका में बने C-130J सुपर हरक्यूलिस जिसकी लोड क्षमता लगभग 19 टन है और यूरोप का एयरबस A400M शामिल है जिसकी क्षमता 37 टन है.

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