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स्वदेशी BVR मिसाइल 'अस्त्र Mk1' की रेंज बढ़ा रहा DRDO, जानिए अब कितनी दूर तक हमला कर पाएगी वायुसेना?

अस्त्र Mk-1 एक स्वदेशी एयर-टू-एयर मिसाइल है जो मैक 4.5 की रफ्तार से दुश्मन के विमान पर हमला करती है. इसे भारतीय वायुसेना के सभी लड़ाकू विमानों के साथ इंटीग्रेट करने की योजना है.

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स्वदेशी BVR मिसाइल 'अस्त्र Mk1' की रेंज बढ़ा रहा DRDO, जानिए अब कितनी दूर तक हमला कर पाएगी वायुसेना?

अस्त्र Mk-1 स्वदेशी एयर-टू-एयर मिसाइल है. (AI इमेज)

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  • Astra Mk-1 की मौजूदा रेंज 80 से 110 किमी है
  • ऑपरेशनल सर्विस में शामिल हो चुकी है अस्त्र Mk1
  • इसे Su-30MKI लड़ाकू विमानों के साथ इंटीग्रेट किया जा चुका है

Astra Mk-1 BVR missile: हवाई युद्ध में 'बियॉन्ड-विज़ुअल-रेंज' मिसाइलों का महत्व अब पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ गया है. दुनिया के ज्यादातर देश अब अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत कर रहे हैं. ऐसे में दुश्मन की सीमा में घुसकर हमला करना मुश्किल होता जा रहा है. हवा में रहते हुए भी लड़ाकू विमान अब आमने-सामने नहीं आते. अब एयर-टू-एयर मिसाइलों से लंबी दूरी से ही दुश्मन को निशाना बनाया जाता है. जो विमान सबसे पहले दुश्मन का पता लगाकर, उसे ट्रैक करके BVR मिसाइल दागकर हमला करता है, उसे आमतौर पर निर्णायक बढ़त मिल जाती है. भारत के पास इस तरह की अपनी स्वदेशी मिसाइल है. खास बात ये है कि अब इसकी ताकत और भी ज्यादा बढ़ने वाली है. 

अस्त्र Mk1 की रेंज बढ़ाने की तैयारी

भारत ने 'अस्त्र Mk1'  एयर-टू-एयर मिसाइल को भारतीय वायु सेना के लिए एक बियॉन्ड-विज़ुअल-रेंज हथियार के रूप में विकसित किया है. शुरुआत में ये मिसाइल 80 से 110 किमी की रेंज वाली थी. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसमें बड़े अपग्रेड किए जा रहे हैं. DRDO इस मिसाइल को 160 से 170 किमी तक हमला करने के लिए अपग्रेड कर रहा है. 

इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग की एक रिपोर्ट के अनुसार, DRDO कोई नई मिसाइल नहीं बना रहा, बल्कि मौजूदा मिसाइल सिस्टम में ही धीरे-धीरे सुधार किया जा रहा है. DRDO स्त्र Mk2 और अस्त्र Mk3 जैसे अगली पीढ़ी के संस्करण भी विकसित कर रहा है. 'अस्त्र Mk1' पहले से ही भारतीय वायु सेना में ऑपरेशनल सर्विस में शामिल हो चुकी है.

बता दें कि अस्त्र Mk1 मिसाइल में सिंगल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर का इस्तेमाल होता है. इस मिसाइल के मौजूदा प्रोपल्शन आर्किटेक्चर में कोई बड़ा बदलाव किए बिना ही इसकी रेंज बढ़ाई जा रही है. इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि पहले से मौजूद प्रोडक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल जारी रखा जा सकता है. एयर फोर्स के लिए भी ये अपग्रेडेशन किफायती साबित होगा. 

अस्त्र Mk-1 कितनी खतरनाक?

अस्त्र Mk-1 को भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों के साथ इंटीग्रेट किया जा चुका है. इसे तेजस Mk-1A और दूसरे फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स के लिए भी तैयार किया जा रहा है. अस्त्र Mk-1 की स्पीड Mach 4.5 तक की है. उड़ान के आखिरी चरण में ये एक्टिव रडार सीकर का इस्तेमाल करती है जिससे दुश्मन के विमान के लिए बचना मुश्किल हो जाता है. रेंज बढ़ जाने के बाद अस्त्र Mk-1 और भी ज्यादा खतरनाक हो जाएगी. 

दूसरे देशों को भी है अस्त्र पर भरोसा

भारत की स्वदेशी एयर-टू-एयर मिसाइल अस्त्र Mk-1 को दूसरे देशों की वायुसेनाएं भी अपने बेड़े में शामिल करना चाहती हैं. हाल ही इंडोनेशिया ने इसके लिए भारत के साथ एक बड़ी डील की है. यह मिसाइल भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की कोशिशों का एक अहम हिस्सा है. इसे भारत की दर्जनों सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियों के सहयोग से विकसित किया गया है. देश में इस मिसाइल का निर्माण फिलहाल भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा किया जाता है. आने वाले समय में इसके उत्पादन का लाइसेंस निजी कंपनियों को भी दिया जा सकता है. 

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