सेहत
हर साल 8 मई 2025 को ‘वर्ल्ड थैलेसीमिया डे’ मनाया जाता है. यह दिन थैलेसीमिया से जूझ रहे लोगों और उनके परिवारों की चुनौतियों की याद दिलाता है. जागरूकता की कमी की वजह से ही इस बीमारी के मरीजों की संख्या भारत में बढ़ती जा रही है.
World Thalassemia Day: थैलेसीमिया बच्चों से जुड़ी एक ऐसी घातक बीमारी है, जो बच्चों को जन्म के साथ ही घेर लेती है. हर साल भारत में इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है. इसकी मुख्य वजह जागरूकता की कमी और थैलेसीमिया जैसी घातक बीमारी के विषय में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं होना है. इसकी जागरूकता के लिए ही हर साल 8 मई 2025 को ‘वर्ल्ड थैलेसीमिया डे’ मनाया जाता है. यह दिन थैलेसीमिया से जूझ रहे लोगों और उनके परिवारों की चुनौतियों की याद दिलाता है. हालांकि एक्सपर्ट डॉक्टर्स की मानें तो किसी भी युवक युवती की शादी के दौरान जन्म कुंडली की जगह पर मेडिकल कुंडली के मिलान से इस घातक बीमारी को रोका जा सकता है. यह एक प्रभावी तरीका है.
थैलेसीमिया एक आनुवंशिक ब्लड डिजीज है. यह बीमारी जन्मजात से ही घेर लेती है. इसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता है, जिससे गंभीर एनीमिया होता है. भारत में करीब 1 लाख से भी ज्यादा लोग थैलेसीमिया जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे हैं. हर साल 10 से 12 हजार नये बच्चे इस बीमारी के साथ जन्म लेते हैं. डॉ. अनिल नौसरान बताते हैं कि इस बीमारी के तेजी से फैलने की वजह ज्यादातर लोगों को इस बीमारी की पूरी जानकारी न होना है. हालांकि इसे विवाह से पूर्व एक छोटे से टेस्ट से रोका जा सकता है.
थैलेसीमिया जैसी घातक बीमारी को लेकर पिछले काफी समय से डॉ अनिल नौसरान जागरूकता अभियान चला रहे हैं. वह बताते हैं कि इस बीमारी को रोकने के लिए सबसे प्रभावी तरीका शादी से पहले लड़के लड़की की ब्लड टेस्ट कराना है. दोनों के ब्लड टेस्ट कराने के बाद आने वाली रिपोर्ट आने वाली उनकी संतान को थैलेसीमिया जैसी घातक बीमारी से बचा सकती है.
डॉ अनिल नौसरान बताते हैं कि हमारे देश में प्रचलन है कि शादी से पहले लड़के लड़की की कुंडली मिलाई जाती है. उनके गुण और गण का मिलाप होने पर ही शादी होती है. ठीक ऐसे ही “मेडिकल कुंडली” को मिलाया जाना चाहिए. शादी से पहले लड़के और लड़की की मामूली ब्लड टेस्ट कराना बेहद जरूरी है. इससे यह पता लगाया जा सकता है कि दोनों विवाह करने वाले व्यक्ति थैलेसीमिया वाहक हैं या नहीं. अगर यदि दोनों वाहक हैं, तो हर गर्भधारण में 25 प्रतिशत संभावना होती है कि बच्चा थैलेसीमिया मेजर डिजीज से पीड़ित होगा. वहीं इस बारे में जागरूकता और सतर्कता से थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के जन्म को रोका जा सकता है.
डॉक्टर बताते हैं कि थैलेसीमिया सिर्फ एक शारीरिक रोग नहीं है. इसकी वजह से बच्चे को जीवनभर जुझना पड़ता है. वहीं परिवार भी भावनात्मक, आर्थिक और मानसिक रपू से परेशान हो जाता है. इससे बचने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है. ऐसे में शादी से पूर्व कुंडली मिलान की तरह ही लड़के और लड़की की मेडिकल कुंडली मिलान अनिवार्य कर इस बीमारी के बढ़ते प्रकोप पर अंकुश लगाया जा सकता है.
Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. इस पर अमल करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)
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