सेहत
World Heart Day 2025: दिल से संबंधित एक छोटी सी भी परेशानी व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर पड़ता है. कई लोग इसके बारे में दिन भर सोचते हैं, जिससे तनाव और चिंता का सामना करते हैं, जो कि दिल पर गहरा असर डालता है.
दिल से जुड़ी कोई भी घटना जैसे हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट, नसों में प्लाक का जमना या स्ट्रोक, किसी व्यक्ति के साथ एक बार भी हो जाए, तो व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर पड़ता है. यह शरीर को गहरा जख्म देता है. मानसिक स्वास्थ्य पर भी काफी ज्यादा असर डालता है. कई लोग इस हादसे के बाद से तनाव, चिंता का सामना करते हैं, जो कि दिल पर असर डाल सकते हैं.
किसी भी व्यक्ति को जब एक बार हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी घटना का सामना करना पड़ जाए , तो व्यक्ति उस हादसे से उभरने के बाद डर और सुरक्षा की चिंता में लग जाता है. हर वक्त यही ख्याल होता है की कहानी दोबारा तो ऐसा नहीं होगा? क्या मैं पूरी तरह से ठीक हो पाऊंगा? ऐसे कई सवाल दिमाग में चलते रहते हैं, लगातार ऐसी स्थिति में बने रहने से तनाव हार्मोन कोर्टिसोल और एड्रीनलीन क स्राव बढ़ता है, जो कि दिल पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं. तो चलिए आर्टेमिस हॉस्पिटल्स के वयस्क हृदय शल्य चिकित्सा के अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र नाथ खन्ना से जानते है कि कैसे तनाव आपके दिल की सेहत के लिए खतरे की घंटी है.
हद से ज्यादा चिंता पैनिक अटैक में बदल सकता है. इससे दिल की धड़कन तेज और अनियमित हो जाती है. लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे, तो दिल की मांसपेशियों पर असर पड़ता है. रक्त वाहिकाओं पर तनाव बढ़ता है नतीजा व्यक्ति दोबारा हार्ट अटैक या स्ट्रोक से पीड़ित हो सकता है.
जब कभी भी हमारे दिमाग में कोई बात चलती है, हम चिंता से घिरे रहते हैं, तो नींद नहीं आती है. नींद की कमी से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, हार्मोन असंतुलित होता है, वजन बढ़ता है, जो कि अप्रत्यक्ष रूप से हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं यही वजह है कि हार्ट पेशेंट के लिए संतुलित नींद और आराम बेहद जरूरी है.
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कई बार लोग तनाव और चिंता में आने के बाद कुछ गलत आदतें अपना लेते हैं, जैसे अत्यधिक खाना, कैफीन का सेवन बढ़ा लेना, कई बार शराब और जंक फूड की लत भी लग जाती है. यह आदतें दिल की सेहत को और भी ज्यादा खराब कर सकती है.
कई बार चिंता और तनाव का असर हीलिंग पर भी पड़ता है. हार्ट अटैक या स्ट्रोक के बाद कुछ दवाइयां चलती हैं, जो कि पर्याप्त आराम लेने से ही अपना असल फायदा पहुंचा पाती है. ऐसे में चिंता और तनाव, इसके प्रभाव को कम कर सकते हैं.
हृदय से जुड़ी किसी भी घटना से उबरने के बाद शरीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना उतना ही जरूरी होता है. अपने दोस्तों या परिवार से इस वक्त मदद लें. ध्यान करें, मेडिटेशन करें, हल्की एक्सरसाइज करें और जरूरत पड़े तो डॉक्टर की भी मदद लें.
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