सेहत
जैसे-जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती है, कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं. खासकर 50 की उम्र के बाद महिलाओं को हड्डियों के कमजोर होने से लेकर जोड़ों के दर्द तक की समस्याएं होने लगती हैं. तो फिर इस प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के कारण और निदान क्या हैं?
जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है, महिलाओं की हड्डियों पर सबसे ज्यादा इफेक्ट दिखता है. उनमें दर्द, कमजोरी या फ्रैक्चर के मामले बढ़ने लगते हैं और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी हड्डियों से संबंधित बीमारियां होने लगती है. विशेषकर 45-50 वर्ष या उससे अधिक आयु में. इसका मतलब यह नहीं है कि यह समस्या केवल उम्र बढ़ने पर ही सामने आती है. ये महिलाओं को किसी भी उम्र में हो सकती है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कभी-कभी दवाओं के दुष्प्रभावों से भी हड्डियों से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं . इससे हड्डियां अपनी ताकत और घनत्व खो देती हैं, और वे अचानक कमजोर हो जाती हैं और मामूली गिरने या चोट लगने पर भी आसानी से टूट सकती हैं! इसलिए, यह समस्या न केवल महिलाओं में, बल्कि पुरुषों में भी दिखाई देने की अधिक संभावना है .
महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद
रजोनिवृत्ति आमतौर पर 45 से 50 वर्ष की उम्र के बीच की महिलाओं में होती है. इसका मतलब है कि उनका मासिक धर्म चक्र या मासिक धर्म बंद हो जाता है . इस अवस्था में महिलाओं के शरीर में कई तरह से बदलाव आने लगते हैं और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी इसी समय शुरू होती हैं .
मुख्य रूप से अचानक वजन बढ़ना , बालों का झड़ना, थकान और सुस्ती आदि . इन सभी स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा, हड्डियां भी अपनी ताकत खोने लगती हैं! तो फिर उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की हड्डियां कमजोर क्यों हो जाती हैं? ये लक्षण किस बीमारी के हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है?
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विशेषज्ञों का कहना है कि इसी कारण महिलाओं की हड्डियां बहुत जल्दी कमजोर होने लगती हैं. यह अक्सर ऑस्टियोपोरोसिस का लक्षण हो सकता है . इसमें हड्डियां बहुत कमजोर हो जाती हैं और मामूली गिरने या झटके से भी फ्रैक्चर हो सकता है .
ऐसे दिखते हैं लक्षण
यदि महिलाओं को लगातार पीठ दर्द , कूल्हों या कंधों में दर्द, बार-बार हड्डियों में फ्रैक्चर, या बार-बार मामूली दर्द या बाहों और पैरों में भारीपन महसूस होता है .स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह ऑस्टियोपोरोसिस का लक्षण हो सकता है . यदि किसी महिला को ऐसे लक्षण महसूस हों तो बेहतर होगा कि वह डॉक्टर से मिलें और संबंधित परीक्षण करवाएं .
कौन से परीक्षण किये जाने चाहिए?
अस्थि खनिज घनत्व परीक्षण (DEXA स्कैन) यह परीक्षण दिखाता है कि हड्डियों में कितना कैल्शियम और खनिज शेष है . इसके अलावा, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन डी, बी12 और कैल्शियम की जांच करवाना भी जरूरी है.
हर चीज के लिए अपने डॉक्टर द्वारा दी गई सलाह का पालन करना आवश्यक है . डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं को समय पर लेने के अलावा दैनिक जीवनशैली और आहार में बदलाव करना भी बहुत जरूरी है. यह भी याद रखें कि कमजोर हड्डियों के किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें.
इन बातों को ध्यान में रखें
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. इस पर अमल करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)
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