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चैन की नींद या Perfect Sleep का जुनून... कहीं सेहत पर भारी न पड़ जाए 'Sleepmaxxing' का वायरल ट्रेंड!

Sleepmaxxing Trend इन दिनों लोगों के बीच काफी चर्चा में है, जिसका मकसद सिर्फ सोना नहीं, बल्कि परफेक्ट तरीके से सोना है. आइए जानें इसके बारे में...

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चैन की नींद या Perfect Sleep का जुनून... कहीं सेहत पर भारी न पड़ जाए 'Sleepmaxxing' का वायरल ट्रेंड!

Sleepmaxxing

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भागदौड़ भरी जिंदगी, काम का बढ़ता बोझ और जरूर से ज्यादा स्क्रीन पर (Bad Lifestyle) समय बिताने के साथ अन्य कई कारणों से नींद की समस्या लोगों में तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि चैन की नींद (Sleep) पाने के लिए लोग नए-नए तरीकों को तलाशते रहते हैं. आजकल बेहतरीन क्वालिटी की नींद लेने के लिए कई लोग सोशल मीडिया पर वायरल वीडियोज में बताए गए हाई-टेक गैजेट्स, स्लीप-ट्रैकर्स का इस्तेमाल करने लगे हैं, साथ ही इसके लिए स्पेशल डाइट भी फॉलो कर रहे हैं. इनमें Sleepmaxxing Trend भी है, जो इन दिनों लोगों के बीच काफी चर्चा में है. 

क्या है Sleepmaxxing Trend?

Sleepmaxxing Trend का मकसद सिर्फ सोना नहीं, बल्कि परफेक्ट तरीके से सोना है, इसमें लोग बेस्ट और परफेक्ट नींद पाने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं. इसके लिए स्लीप ट्रैकिंग, बायोहैकिंग, खास डाइट, खास तरह के गद्दे, ब्लू लाइट ब्लॉकिंग चश्मे और कई तरह के टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि नींद की क्वालिटी में सुधार लाया जा सके.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस ट्रेंड के पीछे साइकोलॉजिकल फैक्टर (ऑप्टिमाइजेशन कल्चर) काम कर रहा है. दरअसल, आज की पीढ़ी सिर्फ काम ही नहीं, बल्कि अपने जीवन के हर पहलू को बेस्ट बनाना चाहती है और इसमें फिटनेस, मेंटल हेल्थ से लेकर नींद तक सबकुछ शामिल है. बिजी जीवनशैली के कारण अब लोग नींद की कमी से बचने के लिए इसे एक जरूरी इन्वेस्टमेंट की तरह देखने लगे हैं. 

इसके फायदे क्या हैं? 

यह अच्छी क्वालिटी की नींद, इम्यून सिस्टम, ब्रेन फंक्शन और एनर्जी लेवल को बढ़ाने में मदद करता है, इससे स्ट्रेस और एंग्जायटी की समस्या भी कम होती है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है. इसके अलावा सही नींद लेने वाले लोग ज्यादा फोकस्ड और एनर्जेटिक होते हैं. 

क्या इसके नुकसान भी हैं?

इसके फायदे तो कई हैं, लेकिन अगर परफेक्ट नींद का जुनून अत्यधिक चिंता और दबाव पैदा करने लगे तो आपके लिए नुकसानदेह भी हो सकता है. ऐसी स्थिति जब लोग अपनी नींद को ट्रैक करते हैं और उनकी रिपोर्ट खराब आती है, तो वे जरूरत से ज्यादा चिंता करने लगते हैं, इसकी वजह से स्लीप एंग्जायटी बढ़ सकती है. 

वहीं जो लोग महंगे गद्दे, स्मार्ट पिलो, हाई-टेक स्लीप ट्रैकर और स्पेशल स्लीपिंग डाइट अपनाते हैं, वे मानसिक और आर्थिक रूप से इस ट्रेंड पर निर्भर हो जाते हैं. इसके अलावा जब कोई नींद को लेकर बहुत ज्यादा सोचने लगे तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है और इंसान ओवरथिंकिंग और अनिद्रा का शिकार हो सकता है. 

(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.)  

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