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Gamma Knife Technique क्या है? AIIMS दिल्ली में पहली बार इस तकनीक से हुआ आंख के कैंसर का इलाज

Gamma Knife Technique: अब आंख के कैंसर (Retinoblastoma) से जूझ रहे बच्चों को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी. दरअसल, AIIMS में इस कैंसर के इलाज के लिए गामा नाइफ रेडिएशन तकनीक शुरू की है...

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Gamma Knife Technique क्या है? AIIMS दिल्ली में पहली बार इस तकनीक से हुआ आंख के कैंसर का इलाज

सांकेतिक तस्वीर 

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भारत में हर साल लगभग 1,500 बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा (Retinoblastoma) नामक नेत्र कैंसर विकसित होता है, आंकड़ों की मानें तो देश में दुनियाभर के मुकाबले रेटिनोब्लास्टोमा के लगभग 25 प्रतिशत मामले सामने आते हैं. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, AIIMS एम्स में हर साल 350 से 400 बच्चे उपचार के लिए पहुंचते हैं. अब तक रेटिनोब्लास्टोमा के इलाज के लिए कीमोथेरेपी (Chemotherapy) और सर्जरी ही प्रमुख विकल्प थे, इस स्थिति में बच्चों की आंख निकालनी पड़ जाती थी. 

लेकिन, अब आंख के कैंसर से जूझ रहे बच्चों को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी. दरअसल, AIIMS में इस कैंसर के इलाज के लिए गामा नाइफ रेडिएशन (Gamma Knife Technique) तकनीक शुरू की है. आइए जानते हैं इस नई तकनीक के बारे में... 

जानें क्या है ये खास तकनीक

गामा नाइफ रेडिएशन तकनीक का उपयोग भारत में पहली बार हुआ है, वहीं दुनिया में दूसरी बार इस तकनीक का इस्तेमाल कैंसर के लिए किया गया है. अभी तक रेटिनोब्लास्टोमा का इलाज कीमोथेरेपी या सर्जरी से होता है. इस तकनीक की मदद से अब बिना बड़े ऑपरेशन के सटीक रेडिएशन से ट्यूमर को खत्म किया जा सकता है. इस खास तकनीक से इलाज जल्दी, सुरक्षित और कम दर्द वाला हो सकता है. इसकी मदद से बच्चों की आंख और उनकी रोशनी बचाई जा सकती है. 

AIIMS के न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टर दीपक अग्रवाल ने बताया कि इससे पहले रूस में इस तकनीक से हुए इलाज के अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं, अब भारत में भी इसके ज़रिए इलाज शुरू किया गया है.  

बच्चों में इस कैंसर के लक्षण

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस स्थिति में बच्चों को धुंधला दिखना, आंखों की पुतली पर सफेदी आना, आंखों में तिरछापन, रोशनी कम होना, आंखे लाल होना, सूजन व दर्द इसके लक्षण हो सकते हैं. ऐसे में इन लक्षणों को ध्यान में रखकर शुरुआती दौर में  बीमारी की पहचान कर ली जाए तो आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है.

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह कैंसर आमतौर पर जेनेटिक कारणों से होता है. इसलिए अगर जन्म के बाद बच्चे में अगर इस कैंसर के लक्षण दिखें तो तुरंत इलाज कराना चाहिए. 

समय पर इलाज

एक्सपर्ट्स के मुताबिक पांच साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाले आंखों के कैंसर में सबसे अधिक मामले रेटिनोब्लास्टोमा कैंसर के देखे जाते हैं. अगर इस कैंसर से पीड़ित बच्चे को समय पर इलाज मिल जाए तो इसे हराकर वह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं. अगर शुरुआती स्टेज में इसका पता चल जाता है तो बच्चे को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है. 

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