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क्या है माइक्रोवेव एब्लेशन तकनीक जो प्रेग्नेंसी में बनी वरदान, गर्भ में ऐसे बची बच्चे की जान

गर्भ में पल रहे बच्चे की जान बचाने में माइक्रोवेव एब्लेशन तकनीक वरदान बन गई. क्या है ये तकनीक और कैसे ये जच्चा और बच्चा दोनों को नई जिंदगी दी, चलिए इसके बारे में जानें.

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क्या है माइक्रोवेव एब्लेशन तकनीक जो प्रेग्नेंसी में बनी वरदान, गर्भ में ऐसे बची बच्चे की जान

क्या है माइक्रोवेव एब्लेशन तकनीक जो प्रेगनेंसी में बनी वरदान

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हाल ही में उनके सामने एक ऐसा मामला आया जिसमें एक 29 साल की एक महिला ने IVF तकनीक की मदद से गर्भधारण किया था और वह जुड़वा बच्चों की मां बनने वाली थीं. परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं था, लेकिन जब जांच की रिपोर्ट आई तो सबके होश उड़ गए क्योंकि रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा था कि दो बच्चों में से एक को डाउन सिंड्रोम है.

यह एक ऐसी स्थिति थी जिसका सामना करना किसी भी परिवार के लिए आसान नहीं था . माता-पिता दुविधा में पड़ गए - एक तरफ वे स्वस्थ बच्चे को चाहते थे, दूसरी तरफ दूसरे बच्चे के साथ भी कोई छेड़छाड़ नहीं करना चाहते थे.

क्या थी समस्या?

समस्या यह थी कि दोनों बच्चे एक ही एमनियोटिक थैली (गर्भाशय की झिल्ली) में विकसित हो रहे थे. इसका मतलब यह था कि यदि किसी एक का गर्भपात किया जाए तो दूसरे को भी नुकसान पहुंच सकता था.

क्या है माइक्रोवेव एब्लेशन तकनीक जो प्रेगनेंसी में बनी वरदान

विज्ञान ने दिखाया नया रास्ता

दिल्ली के प्रतिष्ठित सीके बिड़ला हॉस्पिटल में कार्यरत वरिष्ठ फीटल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. मोलश्री गुप्ता तब इन जुड़वा बच्चों की जान बचाई थी. डॉ. मोलश्री ने बताया कि सामान्यतः इस तरह के मामलों में लेजर थेरेपी का उपयोग किया जाता है, लेकिन इस बार उन्होंने कुछ अलग करने का फैसला किया. उन्होंने माइक्रोवेव एब्लेशन तकनीक का इस्तेमाल किया .

वात्सल्य सेंटर फॉर फीटल मेडिसिन में यह प्रक्रिया पूरी की गई. सिर्फ एक मिनट में डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चे की नाभि नाल को ब्लॉक कर दिया गया . इस दौरान दूसरे बच्चे को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा. आज मां और बच्चा दोनों पूर्णतः स्वस्थ हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं. डॉ. गुप्ता के अनुसार यह तकनीक लेजर थेरेपी की तुलना में अधिक सुरक्षित और किफायती है .

क्या है फीटल मेडिसिन: गर्भ में ही इलाज की नई संभावनाएं

फीटल मेडिसिन का सीधा मतलब है गर्भ में पल रहे बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति को समझना और जरूरत पड़ने पर उसका इलाज करना . यह एक ऐसी शाखा है जो आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की एक अनमोल देन है .

आजकल अल्ट्रासाउंड और आनुवंशिक जांच की मदद से जन्म से पहले ही बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास का पता लगाया जा सकता है . यदि कोई समस्या मिलती है तो उसका इलाज गर्भ में ही शुरू किया जा सकता है .

इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि जटिल गर्भावस्था और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है . डाउन सिंड्रोम जैसे आनुवंशिक विकारों से लेकर अन्य गंभीर बीमारियों की पहचान समय पर हो सकती है .

फीटल मेडिसिन विशेषज्ञ इससे न केवल बच्चे की सेहत के बारे में पेट के अंदर ही जान लेते हैं बल्कि यदि कोई समस्या है तो उसका समाधान भी समय पर मिल जाता है.

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