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TB Risk Factors- Tuberculosis Symptoms: टीबी (तपेदिक या क्षय रोग) एक बेहद गंभीर और जानलेवा संक्रामक बीमारी है, जो आज भी भारत में बेहद गंभीर और जानलेवा सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक कुछ लोगों में सामान्य लोगों की तुलना में टीबी होने का खतरा अधिक होता है.
TB Risk Factors- Tuberculosis Symptoms: टीबी (तपेदिक या क्षय रोग) एक बेहद गंभीर और जानलेवा संक्रामक बीमारी है, जो आज भी भारत में बेहद गंभीर और जानलेवा सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है. आंकड़े बताते हैं कि भारत में दुनिया के कुल टीबी मामलों का लगभग एक-चौथाई हिस्सा मौजूद है, यह बीमारी हर साल लाखों लोगों की जान लेती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह बीमारी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, अगर समय पर इसकी पहचान और इलाज न हो तो खतरनाक रूप ले लेती है. कुछ लोगों में सामान्य लोगों की तुलना में टीबी होने का खतरा अधिक होता है. इसलिए ऐसे लोगों को खास सावधानी बरतने के साथ-साथ समय समय पर जांच कराने की सलाह दी जाती है.
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के मुताबिक, कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्हें टीबी संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा होता है. इन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, समय-समय पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए ताकि बीमारी को शुरुआती चरण में ही पहचाना जा सके. बता दें कि टीबी पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है, लेकिन शुरुआती पहचान बहुत जरूरी है. आइए जानें किन लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है.
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- जो लोग टीबी मरीज के संपर्क में रहते हैं, या फिर घर या आसपास कोई टीबी का मरीज है तो ऐसे लोगों में संक्रमण का खतरा बहुत बढ़ जाता है.
- इसके अलावा कमजोर इम्युनिटी और शरीर में पोषक तत्वों की कमी के हो तो तो भी टीबी आसानी से फैल सकती है.
- पिछले 5 साल में टीबी से ठीक हुए मरीजों को भी इसका खतरा ज्यादा रहता है, पुरानी बीमारी दोबारा लौट सकती है.
- वहीं एचआईवी से पीड़ित व्यक्तियों के लिए कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण टीबी घातक साबित हो सकती है.
- इसके अलावा डायबिटीज के मरीज में ब्लड शुगर कंट्रोल न होने पर टीबी का खतरा बढ़ जाता है.
- 60 से ज्यादा, उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, बढ़ती उम्र में ये खतरा बढ़ जाता है.
- इसके अलावा सिगरेट या बीड़ी का सेवन फेफड़ों को कमजोर बनाता है. ऐसे लोगों को टीबी हो सकता है.
वहीं भीड़भाड़ वाले स्थानों या स्लम एरिया में रहने वाले लोगों यानी अनाथालय, वृद्धाश्रम आदि जगहों पर रहने वाले लोगों के साथ ही स्लम एरिया में निवास करने वाले लोगों को खराब स्वच्छता और रहन-सहन की स्थिति के कारण खतरा अधिक होता है.
नेशनल हेल्थ मिशन मुताबिक इन लोगों में टीबी संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है, ऐसे लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए. किसी भी स्थिति में खांसी, बुखार, वजन घटना, रात में पसीना आना और थकान जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. इससे बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, अच्छा और पौष्टिक भोजन लें और धूम्रपान और शराब से दूर रहें. इसके अलावा जरूरी है कि टीबी के मरीज के संपर्क में आने पर डॉक्टर की सलाह से दवा शुरू करें और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें.
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जानकारी पर आधारित है, इसे विशेषज्ञ सलाह न मानें. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.
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