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Low Heart Rate- Bradycardia: रोजाना एक्सरसाइज करने वालों में, आराम की स्थिति में हार्ट रेट कम होना सामान्य हो सकता है. लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता. डॉ. नवीन भामरी के मुताबिक, कुछ मामलों में धीमी धड़कन किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है. इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए...
Low Heart Rate- Bradycardia: आमतौर पर कई लोग यह मानते हैं कि हार्ट रेट कम होना अच्छी फिटनेस की निशानी है. कुछ लोगों में खासतौर से रोजाना एक्सरसाइज करने वालों में, आराम की स्थिति में हार्ट रेट कम होना सामान्य हो सकता है. लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता. डॉ. नवीन भामरी के मुताबिक, कुछ मामलों में धीमी धड़कन किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है. इस स्थिति में कुछ लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरे से खाली नहीं है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि कब कम हार्ट रेट सामान्य है और कब डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है. आइए जानते हैं इसके बारे में...
डॉ. नवीन भामरी, MD (मेडिसिन), DM (कार्डियोलॉजी), डायरेक्टर - इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली के मुताबिक, हार्ट रेट 60 धड़कन प्रति मिनट से कम हो तो इस कंडीशन को ब्रैडीकार्डिया कहा जाता है. नींद के दौरान या खिलाड़ियों में यह सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर हार्ट रेट लगातार कम रहे और इसके साथ लक्षण भी हों तो यह हार्ट की इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
एक्सपर्ट बताते हैं कि हमारे दिल की धड़कन को नियंत्रित करने का काम SA Node करता है, जिसे शरीर का प्राकृतिक पेसमेकर भी कहा जाता है. इसमें कोई समस्या आती है तो दिल धीमी गति से धड़कने लगता है, शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं पहुंच पाता है.
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डॉ. नवीन भामरी के मुताबिक, ब्रैडीकार्डिया की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके लक्षण अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं और लोग इन्हें थकान, तनाव या बढ़ती उम्र का असर समझ लेते हैं. इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं, जैसे-
रोजाना एक्सरसाइज करने वालों में हार्ट रेट सामान्य से कम हो सकता है और यह अच्छी फिटनेस का संकेत हो सकता है. अगर कम हार्ट रेट के साथ थकान, चक्कर या कमजोरी जैसे लक्षण हों, तो यह हार्ट की धड़कन नियंत्रित करने वाली प्रणाली में समस्या का संकेत हो सकता है.
बुजुर्गों में इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य उम्र बढ़ने का हिस्सा मान लिया जाता है, इस वजह से बीमारी का पता देर से चलता है. आमतौर पर हर बार कम हार्ट रेट चिंता की बात नहीं होती पर अगर इसके साथ कोई लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर जांच और सही इलाज से ब्रैडीकार्डिया को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया जा सकता है और व्यक्ति सामान्य, सक्रिय जीवन जी सकता है. ऐसे में आपका दिल सामान्य से धीमा धड़क रहा है, तो अपने शरीर के संकेतों को समझें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह अवश्य लें.
एक्सपर्ट के मुताबिक, ब्रैडीकार्डिया का पता ECG और होल्टर मॉनिटर जैसी जांचों से लगाया जा सकता है. समय पर जांच बेहद जरूरी है. क्योंकि इलाज में देरी होने पर गिरने, चोट लगने और अन्य गंभीर हृदय समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. अगर समस्या हल्की हो, तो दवाइयों में बदलाव या कारण का इलाज पर्याप्त हो सकता है. हालांकि गंभीर मामलों में पेसमेकर लगाने की जरूरत पड़ सकती है.
इसके अलावा आजकल लीडलैस पेसमेकर जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध है, जो बिना तारों के सीधे दिल के अंदर लगाई जाती है. इससे संक्रमण का खतरा कम होता है, शरीर पर कोई बड़ा निशान नहीं रहता और रिकवरी भी जल्दी होती है.
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