सेहत
Silent Burnout, यानी एक ऐसी थकान जो चेहरे पर नहीं दिखती पर दिमाग और दिल को धीरे-धीरे कमजोर और खोखला कर देती है. इन दिनों ऑफिस कर्मचारियों में ये समस्या तेजी से बढ़ रही है...
What Is Silent Burnout: ऑफिस में लोगों को दिनभर कई अलग-अलग तरह के काम करने पड़ जाते हैं. डेडलाइन, मीटिंग और काम का बढ़ता बोझ इंसान को बुरी तरह से थका देता है. यही वजह है कि इन दिनों ऑफिस जानें वाले लोगों में साइलेंट बर्नआउट जैसी समस्या तेजी से बढ़ रही हैं. बावजूद इसके लोग इसपर उतना ध्यान नहीं दे रहे हैं. Silent Burnout, यानी एक ऐसी थकान जो चेहरे पर नहीं दिखती पर दिमाग और दिल को धीरे-धीरे कमजोर और खोखला कर देती है. आइए जानें इसके बारे में...
भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब जीवनशैली के बीच हर कोई करियर, फिटनेस और सोशल लाइफ को संतुलित करने की कोशिश में रहते हैं. लेकिन, यह किसी मुश्किल टास्क से कम नहीं है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक कई बार बाहरी रूप से सब कुछ सामान्य दिखने के बावजूद अंदर से लोग थकान, खालीपन और उदासी महसूस करते हैं. इसी स्थिति को 'साइलेंट बर्नआउट' कहते हैं. यह ऐसी स्थिति है, जो धीरे-धीरे विकसित होती है और अक्सर व्यक्ति को इसका एहसास भी नहीं होता है.
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस कंडीशन में व्यक्ति अपनी डेली एक्टिविटी को पूरा तो कर लेता है पर अंदर ही अंदर मानसिक थकान और तनाव से जूझ रहा होता है. यह स्थिति खतरनाक हो सकती है, पर अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं.
इस स्थिति में व्यक्ति को लगातार थकान महसूस होती है. पर्याप्त नींद लेने के बावजूद भी यह थकान बनी रहती है. इस कंडीशन में पहले जिस काम को करना पसंद होता था, उनमें भी रुचि नहीं रह जाती है. इसके अलावा छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना या परेशान होना, नींद न आना या बार-बार जागना, सिरदर्द में दर्द होना, पेट दर्द या मांसपेशियों में दर्द की समस्या साइलेंट बर्नआउट का संकेत हो सकते हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए..
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इसके पीछे का बड़ा कारण है काम का बढ़ता बोझ, दूसरों की जीवनशैली से तुलना करना और खुद पर अतिरिक्त दबाव डालना भी इसका एक कारण है. इसके अलावा खुद के लिए समय न निकाल पाना और लगातार व्यस्त रहना, दोस्तों या परिवार से खुलकर बात न कर पाना साइलेंट बर्नआउट का कारण बन सकता है.
मानसिक सेहत पर लोग आज के समय में कम ध्यान देते हैं. लेकिन, साइलेंट बर्नआउट एक ऐसी समस्या है, जो न केवल मेंटल बल्कि शारीरिक सेहत पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है. इसकी वजह से डिप्रेशन, एंग्जायटी, हृदय रोग और इम्यून सिस्टम की कमजोरी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है.
अगर आप साइलेंट बर्नआउट की समस्या से बचना चाहते हैं तो अपने लिए समय निकालें और कम से कम 30 मिनट अपने पसंदीदा गतिविधियों के लिए रखें. इसके अलावा नियमित एक्सरसाइज करना, डिजिटल डिटॉक्स, दोस्तों या परिवार से भावनाएं साझा करने से इस समस्या से बचा जा सकता है. अगर आपको लगता है कि आपको ये समस्या है तो मनोचिकित्सक या काउंसलर से सलाह लें.
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