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Fever Risk: कोरोना के बीच स्कारलेट फीवर का कहर, जानिए क्या है बच्चों में होने वाला जानलेवा बुखार

कोरोना के कहर के बीच में ही बच्चों में एक नए बुखार स्कर्लेट भी तबाही बचा रहा है. इस बीमारी में भी कोरोना जैसे ही लक्षण हैं और ये भी जानलेवा है.

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Fever Risk: कोरोना के बीच स्कारलेट फीवर का कहर, जानिए क्या है बच्चों में होने वाला जानलेवा बुखार

Fever Risk: कोरोना के बीच स्कारलेट फीवर का कहर, जानिए क्या है बच्चों में होने वाला जानलेवा बुखार 

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डीएनए हिंदीः बच्चों के स्कार्लेट फीवर से संक्रमित होने के मामले बढ़ रहे हैं. अकेले यूके में करीब 20 बच्चों की जान इस बीमारी से जा चुकी है. हालांकि अभी भारत में इसके मामले सामने नहीं आए हैं. 

मौसम बदलने के साथ ही दुनिया भर से इन्फ्लुएंजा, एवियन फ्लू, नीपाह फ्लू के बढ़ने की खबरें आई हैं. अब एक नए फीवर ने भी दस्त दे कर डर बढ़ा दिया है. यूके से स्कार्लेट फीवर से पीड़ित होने की बात सामने आ रही है और ये फीवर कई बच्चों की जान ले चुका है. ये फीवर बेहद खतरनाक है. स्कार्लेट फीवर (Scarlet fever) से ग्रस्त होने पर रोगी में कौन-कौन से लक्षण दिखाई पड़ते हैं? क्या यह जानलेवा भी है, आइये जानते हैं.

क्या है स्कार्लेट फीवर (Scarlet Fever)
स्कार्लेट फीवर एक बैक्टीरियल डिजीज है. यह स्कार्लेटिना के रूप में भी जाना जाता है. भारत में स्कारलेट बुखार को लाल बुखार भी कहा जाता है. इससे संक्रमित होने पर तेज बुखार के साथ व्यक्ति के गले में खराश होती है. स्कार्लेट फीवर में शरीर के ज्यादातर भाग में चमकदार लाल दाने हो जाते हैं. यहां तक कि जीभ पर भी दाने हो जाते हैं. जीएएस का रेजरवोइर (reservoir) नाक के म्यूकोसा, एडेनोइड्स और टॉन्सिल में होता है. चिंताजनक बात यह है कि यह फीवर 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों में सबसे अधिक देखा जा रहा है. वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के आंकड़ों के अनुसार यूके में पिछले वर्ष स्कार्लेट फीवर के 186 मामले दर्ज किये गये थे. इस साल अब तक इसके 851 मामले दर्ज किए जा चुके हैं.

स्कारलेट बुखार होने पर व्यक्ति में ये लक्षण दिखायी दे सकते हैं-
तेज बुखार (Fever)
गले में दर्द (pain in throat) , सूजन (swelling in neck)
गले के आसपास लाल दाने (boils) या बॉइल्स होना।
बॉडी रैशेज (Body rashes)

स्कार्लेट बैक्टीरिया ग्रुप ए स्ट्रेप (GAS) में किया गया है क्लासिफाई
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, स्कार्लेट फीवर में शरीर पर दाने हो जाते हैं. यह आमतौर पर स्कूली उम्र और किशोर बच्चों में बैक्टीरियल फेरिनजायटिस (bacterial pharyngitis) से जुड़ा है. इसमें होने वाले रैश को सैंडपेपर रैश कहा जाता है. यह स्ट्रेप्टोकोकस पाइोजेन्स (Streptococcus pyogenes) बैक्टीरिया है. यह संक्रमण के बाद एंडोटॉक्सिन उत्पन्न करता है. इसे ग्रुप ए के रूप में वर्गीकृत किया गया है और ग्रुप ए स्ट्रेप (GAS) के रूप में बताया जाता है. दाने खतरनाक नहीं होते हैं, लेकिन जीएएस संक्रमण के लिए एक मार्कर है. इससे कई तरह की खतरनाक जटिलताएं हो सकती हैं. इन जटिलताओं को रोकने के लिए तीव्र संक्रमण का उपचार आवश्यक है. इसका उपचार पेनिसिलिन है. इसका संक्रमण मयूक्स से फैलता है. इसलिए एक कक्षा में बैठने वाले बच्चों में यह संक्रमण फ़ैल जाता है.

क्या है इस बुखार का उपचार (Scarlet Fever Treatment)
स्कार्लेट फीवर और ज्यादातर बीमारियां जो निकट संपर्क के माध्यम से फैलती हैं, उनमें सिर्फ स्वच्छता पर ध्यान देना होता है. हाथ से संक्रमण फैलने की सबसे अधिक आशंका रहती है. इसलिए हाथ हमेशा साफ़ रहना चाहिए. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, स्कार्लेट ज्वर (Scarlet fever) जीएएस के कारण होने वाले संक्रमण के कारण होता है. स्कार्लेट बुखार के दाने एक टोक्सिन के कारण होते हैं, जो स्ट्रेप बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं. स्कार्लेट बुखार 2 से 10 वर्ष की आयु के बच्चों में आम था. इसका इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से उपचार किया जाता है. 

स्कार्लेट ज्वर में मृत्यु दर कम हुआ
20वीं शताब्दी की शुरुआत में एंटीबायोटिक दवाओं के अभाव में मृत्यु दर लगभग 30% थी. लेकिन एंटीबायोटिक दवाओं की उपलब्धि के कारण स्कार्लेट ज्वर की रुग्णता और मृत्यु दर कम हुआ है. लेकिन इलाज में लापरवाही या समय पर बुखार का पता न चल पाने से बच्चों में इससे मौत भी हो सकती है.

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.) 

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