सेहत
दुर्लभ बीमारियों (रेयर डिजीज) के इलाज में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है सही इलाज का आसानी से उपलब्ध न होना. इस स्थिति में कई मरीजों को बीमारी की पहचान होने में ही वर्षों लग जाते हैं. ऐसी स्थिति में कई बार पुरानी या कम इस्तेमाल होने वाली दवाएं मरीजों के लिए बड़ी मददगार साबित हो सकती हैं.
Drug Repurposing- Old Medicines New Uses: दुर्लभ बीमारियों (रेयर डिजीज) के इलाज में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है सही इलाज का आसानी से उपलब्ध न होना. इस स्थिति में कई मरीजों को बीमारी की पहचान होने में ही वर्षों लग जाते हैं. कई बार बीमारी का पता चलने के बाद भी डॉक्टरों को ऐसी दवा या इलाज ढूंढने में कठिनाई हो सकती है, जो मरीज के लिए प्रभावी हो, आसानी से मिल जाए और उसकी लागत भी कम हो. ऐसी स्थिति में कई बार पुरानी या कम इस्तेमाल होने वाली दवाएं मरीजों के लिए बड़ी मददगार साबित हो सकती हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक ये दवाएं भले ही नई न हों या इनके बारे में ज्यादा चर्चा न होती हो, लेकिन कई मामलों में इनकी उपयोगिता आज भी बनी हुई है. कुछ ऐसी दवाएं हैं, जो सालों पहले विकसित की गई थीं, कुछ का इस्तेमाल केवल खास बीमारियों में किया जाता है और कुछ दवाएं बाजार में कम दिखाई देती हैं लेकिन चिकित्सा के लिहाज से अब भी महत्वपूर्ण हैं. दुर्लभ, उपेक्षित या जटिल बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए ऐसी दवाएं इलाज का अहम विकल्प बन जाती हैं.
डॉ. सूफी रूमी, मेडिकल स्पोक्सपर्सन, जॉली हेल्थकेयर के मुताबिक, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. जिन बीमारियों के लिए ये दवाएं बनाई जाती हैं, उनके मरीज बहुत कम होते हैं. ऐसे में दवा कंपनियां इनका ज्यादा प्रचार नहीं करती हैं. वहीं, नई दवाएं आने के बाद पुरानी लेकिन असरदार दवाओं पर ध्यान कम हो जाता है. इसके अलावा जानकारी की कमी, दवा की सीमित उपलब्धता और कम मांग जैसी वजहों से भी कुछ दवाएं आसानी से नहीं मिल पाती हैं. किसी दवा का पुराना या कम चर्चित होना यह नहीं बताता कि वह कम उपयोगी है.
ऐसी कई दवाएं आज भी खास बीमारियों के इलाज में अहम भूमिका निभाती हैं, खासकर तब जब इलाज के विकल्प बहुत कम हों. रेयर डिजीज के मरीजों के लिए ऐसी दवाएं कई बार बीमारी को नियंत्रित करने, लक्षणों को कम करने और बेहतर जीवन जीने में महत्वपूर्ण मदद कर सकती हैं.
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एक्सपर्ट के मुताबिक, रेयर डिजीज के मरीजों को अक्सर कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. बीमारी की सही पहचान में देरी, इलाज का अधिक खर्च और विशेष दवाओं की सीमित उपलब्धता उपचार को मुश्किल बना देती है. कई बार डॉक्टरों को यह पता होता है कि मरीज को किस दवा या थेरेपी की जरूरत है, लेकिन उस दवा तक पहुंच बनाना ही बड़ी चुनौती बन जाता है. यह समस्या खासतौर पर उन दवाओं के साथ अधिक देखने को मिलती है जो आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं या जिनका उपयोग दुर्लभ संक्रमणों, मेटाबॉलिक विकारों, आनुवंशिक बीमारियों और अन्य कम प्रचलित रोगों के इलाज में किया जाता है.
ऐसे मामलों में स्वास्थ्य व्यवस्था को ऐसे भरोसेमंद सहयोगियों की जरूरत होती है, जो जरूरी और विशेष उपचार मरीजों तक पहुंचाने में मदद कर सकें. किसी दवा का समय पर उपलब्ध होना केवल आपूर्ति का मामला नहीं है, बल्कि इससे इलाज की निरंतरता, बीमारी की स्थिति और मरीज के स्वास्थ्य परिणाम सीधे प्रभावित हो सकते हैं.
रेयर डिजीज के इलाज में पहले से मौजूद दवाओं का नए तरीके से इस्तेमाल भी मददगार साबित हो सकता है. यानी किसी दवा को, जो पहले किसी दूसरी बीमारी के लिए इस्तेमाल होती थी, वैज्ञानिक शोध के आधार पर किसी नई बीमारी के इलाज में उपयोग किया जाए. यह तरीका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दवा बनाने और उसे मंजूरी मिलने में कई साल लग सकते हैं. वहीं, पुरानी दवाओं के बारे में पहले से काफी जानकारी उपलब्ध होती है, इसलिए उन्हें जरूरतमंद मरीजों तक जल्दी पहुंचाया जा सकता है.
ऐसे में किसी दवा का महत्व केवल इस बात से नहीं तय होता कि वह बाजार में कितनी लोकप्रिय है. रेयर डिजीज के मरीजों के लिए कई बार ऐसी दवाएं ही सबसे बड़ी उम्मीद बन जाती हैं. इसलिए जरूरी है कि इन दवाओं की उपलब्धता बढ़ाई जाए, डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच इनके बारे में जानकारी बढ़े और मरीजों तक इन्हें पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत हो. इससे कई मरीजों को समय पर सही इलाज मिल सकेगा और कोई उपयोगी दवा सिर्फ कम पहचान की वजह से नजरअंदाज नहीं होगी.
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