सेहत
Health News: केंद्र सरकार का मकसद दवाओं पर हो रही अतिरिक्त वसूली को रोकना है. जिन दवाओं के दाम तय किए गए हैं, उनमें से ज्यादातर बेहद जरूरी कैटेगरी की हैं.
Health News: एक ही दवा के लिए अलग-अलग कंपनियों के दामों में जमीन-आसमान का अंतर दिखाई देने की समस्या अब नहीं होगी. दरअसल केंद्र सरकार ने अलग-अलग बीमारियों की 41 दवाओं का मेक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) फिक्स कर दिया है. अब दवा कंपनियां इस प्राइस से ज्यादा कीमत पर पर अपनी दवाई नहीं बेच पाएंगी. हालांकि उन्हें दवा की एमआरपी से अलग गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) की वसूली करने का अधिकार होगा, लेकिन यह काम भी कंपनियां पहले सरकार को जीएसटी चुकाकर ही कर पाएंगी. इन 41 दवाओं में से ज्यादातर बुखार, दर्द, डायबिटीज जैसी रोजाना काम आने वाली दवाएं शामिल हैं. सरकार ने हर दुकानदार और डीलर को भी दवा निर्माता कंपनी की तरफ से मिली प्राइस लिस्ट दुकान में ऐसी जगह लगाने का आदेश दिया है, जहां से वह आसानी से कस्टमर को दिखाई दे सके. इसके लिए नेशनल फॉर्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है.
नोटिफिकेशन में कही गई है ये बात
NPPA नोटिफिकेशन (NPPA Notification For Medicine Prices) में कहा गया है कि 41 तरह की 'नई दवा" के अधिकतम दाम दवा निर्माता कंपनी को तय करने होंगे. इस रिटेल प्राइस पर सरकार को जीएसटी का भुगतान करके कंपनी केवल उसे ही अलग से जोड़ सकती है. इनमें से ज्यादा दवाई बुखार, दर्द, स्ट्रेस, हार्ट और डायबिटीज जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की दवाइयां हैं.
निर्देशों का पालन नहीं होने पर ब्याज सहित होगी वसूली
NPPA ने यह भी कहा है कि ग्राहकों को दवा की कीमत आसानी से दिखाई दे, इसके लिए ही दुकानदार को अपनी दुकान में दवा निर्माता कंपनी की प्राइस लिस्ट स्पष्ट तरीके से लगानी होगी. सरकार की तरफ से बनाए सभी नियमों और शर्तों का पालन कर रहे दवा निर्माताओं पर ही रिटेल प्राइस रूल लागू होगा. यदि निर्देशों के विपरीत काम किया जाता है तो सरकार दुकानदार से अतिरिक्त वसूली गई राशि को ब्याज समेत वसूलेगी.
इन दवाओं के लिए तय हुए हैं रेट
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