सेहत
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), कालीकट के वैज्ञानिकों ने एक खास डिवाइस बनाया है, जिसकी मदद से खून में होने वाले जानलेवा संक्रमण ‘सेप्सिस‘ का पता सिर्फ कुछ ही मिनटों में लगाया जा सकता है.
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), कालीकट के वैज्ञानिकों ने एक खास डिवाइस बनाया है, जिसकी मदद से खून में होने वाले जानलेवा संक्रमण ‘सेप्सिस‘ का पता सिर्फ कुछ ही मिनटों में लगाया सकता है. बता दें कि यह सस्ता, पोर्टेबल नैनो-सेंसर या डिवाइस एंडोटॉक्सिन की पहचान करता है. बता दें कि इस स्थिति में एंडोटॉक्सिन नामक बायोमार्कर की पहचान जरूरी है, जो ग्राम-निगेटिव बैक्टीरिया की बाहरी परत का एक जहरीला हिस्सा होता है. आइए जानते हैं क्या है सेप्सिस और इस बीमारी में कैसे इस नैनो-सेंसर से होगी जांच...
सेप्सिस एक गंभीर इन्फेक्शन है जो शरीर में तेजी से फैलता है. इसे सेप्टिसीमिया ब्लड इंफेक्शन कहा जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसमे ब्लड में घूमने वाले केमिकल शरीर में सूजन और जलन पैदा करने लगते हैं और इसकी वजह से शरीर में कई सारी दिक्कते होने लगती हैं, जिसका कई अंगों पर असर पड़ सकता है.
ऐसे में अगर वक्त रहते इसका पता न चले और इलाज न हो, तो ये शरीर के कई अंगों को खराब कर देता है और इस स्थिति में मरीज को शॉक लग सकता है, जिससे जान भी जा सकती है. इतना ही नहीं कुछ मामलों में सेप्सिस के कारण होने वाले गंभीर संक्रमणों के कारण प्रभावित अंगों, जैसे उंगलियों, पैर की उंगलियों या अन्य अंगों को काटना भी पड़ जाता है.
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक आमतौर पर सेप्सिस का पता चलने में वक्त लग जाता है, तब तक मरीज की हालत काफी बिगड़ जाती है. हालांकि अब वैज्ञानिकों ने जो नैनो-सेंसर बनाया है, वो इस बीमारी को शुरुआती स्टेज पर ही पहचान लेता है. इस डिवाइस की मदद से अब सही समय पर इसका इलाज करने में मदद मिलेगी.
वैज्ञानिकों की एक टीम ने कुल आठ अलग-अलग तरह के सेंसर बनाए और इनमें से सात सेंसर इलेक्ट्रोकेमिकल तकनीक पर काम करते हैं और एक ऑप्टिकल यानी रौशनी से संबंधित तकनीक पर काम करता है. इनमें नैनो-टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिससे ये बहुत छोटा पर बेहद असरदार बन जाता है.
बता दें कि इसे खून, फलों के रस या इंसुलिन जैसे दवाओं में एंडोटॉक्सिन की मौजूदगी जांचने के लिए इस्तेमाल किया गया और हर बार इसका रिजल्ट काफी सटीक निकला. एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह डिवाइस ब्लड सीरम में एंडोटॉक्सिन की मौजूदगी को सिर्फ 10 मिनट में पकड़ सकता है. इतना ही नहीं यह ई. कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया की भी पहचान कर सकता है.
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