Advertisement

Ayushman Card: इलाज की राह में रोड़ा, 'आयुष्मान भारत योजना' से किनारा काट रहे निजी अस्पताल, क्या है वजह?

Ayushman Bharat Scheme: आयुष्मान योजना से देश के निजी अस्पताल किनारा काटने लगे हैं. इसको लेकर हाल ही में जो आंकड़े सामने आए हैं, वो चौंकाने वाले हैं...

Latest News
Ayushman Card: इलाज की राह में रोड़ा, 'आयुष्मान भारत योजना' से किनारा काट रहे निजी अस्पताल, क्या है वजह?

why private hospitals withdrawing from AB PMJAY scheme 

Add DNA as a Preferred Source

Ayushman Bharat Scheme: देश में गरीब लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार आयुष्मान योजना चला रही है, इसकी मदद से छोटी-मोटी बीमारियों से लेकर कैंसर तक का इलाज किया जाता है. बता दें कि आयुष्मान भारत योजना देश की 40 फीसदी आबादी को 5 लाख तक का सालान इलाज मुफ्त करवाने की गारंटी देती है.

हालांकि अब आयुष्मान योजना से देश के निजी अस्पताल किनारा काटने लगे हैं. इसको लेकर हाल ही में जो आंकड़े सामने आए हैं, वो चौंकाने वाले हैं. आइए जानते हैं आखिर क्यों निजी अस्पतालों ने इस योजना से मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है, इसके पीछे की बड़ी वजह क्या है? 

2024–25 में नए अस्पतालों का जुड़ना कम हुआ है

आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024–25 में सिर्फ 2,113 अस्पताल ही आयुष्मान भारत योजना से जुड़े हैं, 2023–24 में यह संख्या 4,271 थी और 2022–23 की बात करें तो इस योजना से जुड़ने वाले निजी अस्पतालों की संख्या 3,124 थी. ऐसे में यह साफ हो रहा है कि योजना से जुड़ने वाले अस्पतालों की संख्या में गिरावट आ रही है. 

इस योजना में कुल कितने अस्पताल हैं शामिल? 

जानकारी के मुताबिक, फिलहाल देशभर में कुल 31,466 अस्पताल इस योजना के तहत शामिल हो चुके हैं, इनमें से 14,194 निजी अस्पताल हैं. इससे यह साफ हो रहा है कि योजना का दायरा तो बढ़ा है, पर नई भागीदारी में कमी आ रही है.

क्यों पीछे हट रहे हैं निजी अस्पताल? 

इसके पीछे की पहली बड़ी वजह है क्लेम भुगतान में देरी, नियम ये है कि राज्यों के अंदर के मरीजों का भुगतान 15 दिनों में और अन्य राज्यों के मरीजों का भुगतान 30 दिनों में होना चाहिए. पर यह समय सीमा बहुत बार टूटती है, खासतौर से बड़े अस्पतालों और महंगे इलाज के मामलों में ऐसा होता है.

इसके अलावा कई निजी अस्पतालों का कहना है कि इलाज के बदले जो पैसा मिलता है, वह लागत से भी कम होता है. इसकी वजह से उन्हें आर्थिक नुकसान होता है. यह इसकी दूसरी बड़ी वजह है.. 

IMA ने उठाए थे सवाल 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी IMA ने इस योजना से जुड़ी कुछ खामियों पर सवाल खड़े किए हैं, IMA का दावा है कि आयुष्मान योजना के तहत पेमेंट में देरी होती है और यह प्रक्रिया जटिल भी बहुत है. आकड़ों के मुताबिक गुजरात में 2021-2023 के बीच अस्पतालों के 300 करोड़ रुपये का भुगतान अभी बकाया है.

वहीं केरल में 400 करोड़ और पूरे देश में लगभग 1.21 लाख करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हुआ है. यही वजह है कि ज्यादातर निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से नहीं जुड़ना चाहते हैं. 

हरियाणा में निजी अस्पतालों का इस योजना से पीछे हटने का फैसला

इसके अलावा हरियाणा के लगभग 650 से 700 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से 7 अगस्त से हटने की तैयारी में हैं, इसकी वजह बताई जा रही है कि यहां 500 करोड़ रुपये से ज़्यादा की बकाया राशि बाकी है. 

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x,   इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.

 

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement