सेहत
घंटों मोबाइल पर बात करना आपके कान या दिमाग ही नहीं दिल और ब्लड प्रेशर की समस्या को बढ़ा सकता है. घंटों मोबाइल पर बात करने से हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हो सकते हैं, जो हार्ट अटैक से लेकर स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देता है.
डीएनए हिंदी: (To Much Phone Calls Increasing Risk of High Blood Pressure) आज के समय में युवा से लेकर बच्चों तक के हाथ में स्मार्ट फोन है. लोग दिन का ज्यादा हिस्सा काॅल पर बात करने से लेकर स्क्रिन देखने में निकालते हैं. ऐसे में घंटों मोबाइल पर बात करने वाले लोग दिल की बीमारियों के शिकार हो सकते हैं. इतना ही नहीं यह हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है. यह दावा हाल ही में यूरोपियन सोसायटी ऑफ कार्डियोलाॅजी जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च में किया गया है. रिसर्च में बताया गया है कि लोग जितने घंटे मोबाइल पर बात करने में बिताते हैं. उतना ही दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
रिसर्च की मानें तो दुनिया में फोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. 10 साल से अधिक उम्र के करीब 3 चौथाई लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते है. वहीं करीब 30 से 79 साल के 13 बिलियन लोग हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी के शिकार है. यह बीमारी ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाकर हार्ट अटैक से लेकर स्ट्रोक का खतरा पैदा करती है. यही वजह है कि दुनिया भर में हार्ट अटैक से लेकर स्ट्रोक के चलते मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है.
मोबाइल फोन से है खतरा
रिसर्च के अनुसार, मोबाइल फोन में रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा के निम्न स्तर का उत्सर्जन करते है. यह शाॅर्ट टर्म एक्सपोजर के साथ ब्लड प्रेशर को बढ़ाने की वजह बन सकते हैं. मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल दिल को प्रभावित करता है. इसका दावा पहले भी हुई स्टडी में किया गया है. जिसमें माना गया कि मोबाइल पर घंटों मैसेज और गेम खोलना भी खतरनाक है.
2 लाख लोगों पर किया गया शोध
रिपोर्ट के अनुसार, फोन काॅल करने से लेकर रिसीवर और न्यू हाइपरटेंशन के बीच क्या संबंध हैं. इसकी जांच की गई. इसमें रिसर्च में यूके बायोबैंक के डेटा का यूज किया गया. साथ ही रिसर्च में हाई ब्लड प्रेशर के 37 से 73 साल के 2 लाख 12 हजार लोगों को शामिल किया गया. सभी के काॅल करने से लेकर रिसीव करने का डेटा तैयार किया गया. सभी मोबाइल पर बात करने का समय नोट किया गया. साथ ही कुछ लोगों को फोन से दूर रखा गया. रिसर्च में शामिल 88 प्रतिशत लोग को हाई बीपी की शिकायत मिली. इनमें 62 प्रतिशत महिलाएं थी. वहीं रिसर्च में शामिल जो लोग मोबाइल का ज्यादा यूज नहीं करते थे. उनमें मोबाइल यूज करने का जोखिम 7 प्रतिशत तक ज्यादा था.
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