सेहत
पुरुष प्रजनन क्षमता में गिरावट पर एक हालिय रिपोर्ट पुरुषों के लिए अलर्ट है क्योंकि इस स्टडी में पाया गया है कि खाने में मौजूद एक खास तरह का रसायन उनकी फर्टिलिटी को कम कर रहा है.
पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या में कमी हमेशा से चर्चा का विषय रही है. कई पुरुष इस समस्या से जूझते हैं. इस समस्या के समाधान के लिए वे ऑनलाइन पोर्टल्स की मदद लेते हैं. लेकिन ज़्यादातर लोग यह नहीं जानते कि उनके दैनिक आहार में शामिल कुछ खाद्य पदार्थ शुक्राणुओं की संख्या को प्रभावित करते हैं. इस संबंध में एक नई रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट में क्या है? आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
चूहों पर हुआ है प्रयोग
एक नए अध्ययन में पाया गया है कि कृषि में इस्तेमाल होने वाले "नियोनिकोटिनॉइड्स" नामक कीटनाशक पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या और उनकी गुणवत्ता को तेज़ी से कम कर रहे हैं. प्रयोगशाला में नर चूहों पर किए गए परीक्षणों में पाया गया कि इन रसायनों ने शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और संरचना को नुकसान पहुँचाया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि मनुष्यों पर भी इसी तरह के प्रभाव पड़ने की बहुत संभावना है.
20 वर्षों में किए गए 21 अध्ययनों का विश्लेषण
"एनवायरनमेंटल रिसर्च" पत्रिका में प्रकाशित एक समीक्षा में 2005 से 2025 तक के 21 प्रयोगों का अध्ययन किया गया. वैज्ञानिकों ने पाया कि नियोनिकोटिनोइड्स के संपर्क में आने वाले जानवरों में वृषण ऊतक क्षतिग्रस्त हो गए, हार्मोन संतुलन बिगड़ गया और शुक्राणु उत्पादन में काफी कमी आई.
भोजन के माध्यम से शरीर में सीधे प्रवेश
ये कीटनाशक जड़ों से लेकर पत्तियों तक पूरी तरह अवशोषित हो जाते हैं. इसलिए, फलों और सब्जियों को चाहे जितना भी धो लें, इनके अवशेष रह ही जाते हैं. अमेरिका में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि इन रसायनों के कण 50 प्रतिशत से ज़्यादा लोगों के शरीर में पाए गए, और बच्चों में तो और भी ज़्यादा. वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि इसका मतलब है कि ये ज़हरीले पदार्थ हमारे शरीर में रोज़ाना खाने के ज़रिए पहुँचते हैं.
शरीर पर वास्तव में क्या प्रभाव पड़ता है?
शोध के निष्कर्ष में कहा गया है कि बढ़ा हुआ ऑक्सीडेटिव तनाव शुक्राणु कोशिकाओं और उनके डीएनए को नुकसान पहुँचाता है, पुरुष हार्मोन संकेतन को बाधित करता है, और वृषण ऊतक को नष्ट करता है. इसके परिणामस्वरूप, शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता कम हो जाती है, और प्रजनन क्षमता कम हो जाती है, जैसा कि आगे बताया गया है.
विशेषज्ञ की चेतावनी
प्रमुख शोधकर्ता सुमैया इरफ़ान और वेरोनिका सांचेज़ ने कहा, "यह शोध सिर्फ़ जानवरों तक सीमित नहीं है. चूँकि सभी स्तनधारियों में शुक्राणु निर्माण की प्रक्रिया समान होती है, इसलिए यह जोखिम मनुष्यों पर भी लागू होता है. भोजन में कीटनाशकों के अवशेष धीरे-धीरे पुरुषों की प्रजनन क्षमता को कम कर रहे हैं." इसलिए, कीटनाशकों के इस्तेमाल को कम करने और जैविक खेती अपनाने की ज़रूरत अब ज़ोर पकड़ रही है.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: पुरुषों में शुक्राणुओं की कम संख्या का अब क्या नया कारण सामने आया है?
उत्तर: नए शोध से पता चला है कि कृषि में इस्तेमाल होने वाले "नियोनिकोटिनॉइड्स" नामक कीटनाशक शुक्राणुओं की संख्या, गुणवत्ता और गतिशीलता को कम करते हैं. ये रसायन भोजन के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं.
प्रश्न: क्या फलों और सब्जियों को धोने पर भी ये कीटनाशक नहीं निकलते?
उत्तर: नहीं. ये नियोनिकोटिनोइड्स पौधे के अंदर पूरी तरह से अवशोषित हो जाते हैं, इसलिए फलों और सब्जियों को पानी से धोने के बाद भी इनके अवशेष रह जाते हैं और ये हमारे दैनिक आहार के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं.
प्रश्न: क्या यह शोध केवल जानवरों पर ही किया जा रहा है या मनुष्यों के लिए भी इसका खतरा है?
उत्तर: हालाँकि यह शोध जानवरों पर किया गया था, लेकिन शुक्राणु निर्माण की प्रक्रिया सभी स्तनधारियों (मनुष्यों सहित) में समान होती है. ये रसायन संयुक्त राज्य अमेरिका के आधे लोगों के शरीर में पाए गए हैं और बच्चों में इनका स्तर अधिक है. इसलिए, मनुष्यों में भी प्रजनन क्षमता पर गंभीर प्रभाव पड़ने का खतरा है.
Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. डीएनए इसकी पुष्टी नहीं करता है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.
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