सेहत
हाल ही में आइए एक रिसर्च में दावा किया गया है कि जो लोग लंबे समय से इस तरह की दवा लेते हैं, उनमें दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है.
Antidepressants And Heart Attack Risk- आजकल की खराब जीवनशैली, खानपान की गलत आदतें, कम फिजिकल एक्टिविटी के अलावा अन्य कई कारणों से दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा लोगों में तेजी से बढ़ रहा है. हाल ही में हुए एक स्टडी में इसको लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिसर्च में दावा किया गया है कि जो लोग लंबे समय से डिप्रेशन (Anti Depressant) की दवा लेते हैं, उनमें भी दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम. जी हां, एक्सपर्ट्स का दावा है कि आपके दिल के लिए एंटीडिप्रेसेंट्स दवाएं गंभीर समस्या पैदा कर सकती हैं. तो आइए जानें किस तरह यह आपको दिल (Long-term Antidepressant) पर असर करता है, क्या कहती है स्टडी...
एक्सपर्ट्स के मुताबिक आजकल की तेज-रफ्तार जिंदगी में डिप्रेशन आम समस्या बनती जा रही है, ऐसे में लोग इससे बचने के लिए एंटीडिप्रेसेंट्स दवाओं की मदद ले रहे हैं. नई स्टडी के मुताबिक लंबे समय तक डिप्रेशन की दवाएं लेने से आपके दिल पर खतरनाक असर पड़ सकता है.
स्टडी के मुताबिक एंटीडिप्रेसेंट्स का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से कार्डियक अरेस्ट (हृदय गति रुकने) का खतरा बढ़ा सकता है और इससे समय से पहले जान जा सकती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसमें बचने तक का मौका नहीं मिलता है. जानें डिप्रेशन की दवाओं के खतरा...
डेनमार्क में करीब 43 लाख लोगों पर हुई इस स्टडी में पाया गया कि जो लोग कम से कम 1 से 5 साल तक एंटीडिप्रेसेंट लेते हैं, उनमें अचानक से हार्ट फेल होने का खतरा 56 फीसदी तक ज्यादा होता है. इतना ही नहीं 6 साल या उससे ज्यादा समय तक इन दवाओं का सेवन करने वालों में इसका खतरा 2.2 गुना तक बढ़ा सकता है. यह स्टडी यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी के साइंटिस्ट सम्मेलन EHRA में पेश किया गया.
स्टडी में दावा किया गया है कि 30 से 39 साल की उम्र में 1 से 5 साल तक एंटीडिप्रेसेंट लेने वालों में अचानक हृदयगति रुकने का खतरा बिना दवा लेने वालों की तुलना में करीब 3 गुना ज्यादा था. दूसरी ओर 6 साल या उससे ज्यादा समय तक दवा लेने वालों में इसका खतरा 5 गुना तक बढ़ जाता है.
डेनमार्क केकोपेनहेगन रिग्सहॉस्पिटलेट हार्ट सेंटर के डॉ. जस्मिन मुज्कानोविक के मुताबिक एंटीडिप्रेसेंट जितने लंबे समय से लेंगे, उन लोगों में अचानक कार्डियक अरेस्ट (Sudden Cardiac Arrest) का खतरा उतना ही ज्यादा होगा. इसके अलावा जो लोग 6 साल या उससे ज्यादा समय तक दवा लेते हैं, उनमें भी खतरा इससे कहीं ज्यादा होता है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक 39 साल से कम उम्र के लोगों में यह समस्या अक्सर दिल की मांसपेशियों के मोटा होने संबंधी समस्याओं से होती है. वहीं बुजुर्गों में, हार्ट को ब्लड सप्लाई करने वाली नसों का संकुचित होना इसका सबसे बड़ा कारण है.
(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.)
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