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गाय के दूध में H5N1 बर्ड फ्लू वायरस, संक्रमण के खिलाफ मौजूदा Antiviral दवाएं कम प्रभावी! Study

Cow Milk And Bird Flu: वैज्ञानिकों ने पाया की मौजूदा एंटीवायरल इस H5N1 बर्ड फ्लू स्ट्रेन के खिलाफ कम प्रभावी हो सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं इस वायरस से बचाव का प्रभावी तरीका क्या है... 

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गाय के दूध में H5N1 बर्ड फ्लू वायरस, संक्रमण के खिलाफ मौजूदा Antiviral दवाएं कम प्रभावी! Study

Bird Flu

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हाल ही के दिनों में कई ऐसी खबरें सामने आई हैं, जिनमें बर्ड फ्लू या एवियन इन्फ्लूएंजा (Avian Influenza) का संक्रमण गाय के दूध में भी पाए जाने की बात कही गई है. इसको लेकर अब एक और स्टडी (Bird Flu) सामने आई है. इस स्टडी के मुताबिक अक्सर इस्तेमाल किए जाने वाले फ्लू एंटीवायरल गाय के दूध में H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस के खिलाफ अच्छी तरह से काम नहीं करते हैं.

वैज्ञानिकों ने पाया की मौजूदा एंटीवायरल (Antivirals) इस H5N1 बर्ड फ्लू स्ट्रेन के खिलाफ कम प्रभावी हो सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं इस वायरस से बचाव का प्रभावी तरीका क्या है... 

बर्ड फ्लू और गाय का दूध का कनेक्शन

कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि बर्ड फ्लू वायरस गायों में भी पाया गया है. ऐसे में लोगों में दूध को लेकर भी चिंता बढ़ गई. हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य वैज्ञानिक एजेंसियों ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि बर्ड फ्लू वायरस दूध के माध्यम से इंसानों में फैल सकता है. 

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक संक्रमित गाय का दूध असुरक्षित हो सकता है, लेकिन दूध को उबालकर या पाश्चुरीकृत (Pasteurization) करने पर इसमें मौजूद वायरस नष्ट हो जाते हैं. वहीं अगर कच्चा दूध पीते हैं तो इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.. 

कच्चे दूध पीने से बचने की सलाह

यह वायरस डेयरी गायों के दूध में पाया गया है और इसने खेत मजदूरों को संक्रमित किया है. ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि कच्चा दूध न पीकर और डेयरी फार्म मजदूरों के जोखिम को कम करके संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता है. लोगों में H5N1 संक्रमण दुर्लभ है, लेकिन रिपोर्ट्स के मानें तो वर्तमान प्रकोप में अब तक 60 से अधिक लोग डेयरी उत्पादों के संपर्क में आने से संक्रमित हो चुके हैं. 

इस बात का रखें ध्यान

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक बर्ड फ्लू का संक्रमण दूध से फैलने की संभावना बहुत कम है. दूध को पाश्चुरीकृत किया गया हो या सही तापमान पर उबाला गया हो, तो यह पूरी तरह से सेफ होता है. पाश्चुरीकरण प्रक्रिया में दूध को 72°C तापमान पर 15 सेकंड तक गर्म किया जाता है और इससे दूध में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं. 

(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.)

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