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केरल में फिर मिले Monkeypox के केस, वायनाड और कन्नूर में 2 व्यक्ति संक्रमित

Mpox Case: केरल के वायनाड और कन्नूर में मंकीपॉक्स के दो नए मामले आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के संपर्क में आए लोगों की निगरानी का निर्देश दिया है, जानें क्या है मंकीपॉक्स और कैसे फैलती है ये बीमारी...

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केरल में फिर मिले Monkeypox के केस, वायनाड और कन्नूर में 2 व्यक्ति संक्रमित

Mpox Case

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केरल (Kerala) के वायनाड और कन्नूर में मंकीपॉक्स के दो नए मामले दर्ज किए गए हैं, बता दें कि  वायनाड जिले के एक व्यक्ति में पहले और कन्नूर के एक व्यक्ति में बाद में संक्रमण की पुष्टि हुई (Mpox Case). ऐसे में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है. संक्रमण की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के संपर्क में आए लोगों की निगरानी का निर्देश दिया है. इससे पहले (Monkeypox Virus) सितंबर के महीने में वैश्विक स्तर पर इस बीमारी के फैलने के बाद केरल में मंकीपॉक्स के कुछ मामले सामने आए थे...

क्या है मंकीपॉक्स?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक मंकीपॉक्स एक वायरल डिजीज है और यह एमपॉक्स वायरस के जरिए फैलता है.मंकीपॉक्स वायरस, स्मॉल पॉक्स (चेचक) की फैमिली या उस जैसे वायरस ग्रुप का मेंबर है. हालांकि ये चेचक से कम हानिकारक है. 1970 में अफ्रीका के कांगो में मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया था, जिसके बाद 90 का दशक आते-आते अफ्रीका के तमाम देशों में फैल गया और साल 2022 में तो इस वायरस ने यूरोप से लेकर अमेरिका तक में कहर बरपाया.


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कौन सा स्ट्रेन है ज्यादा खतरनाक?
मंकीपॉक्स के मुख्य तौर पर दो स्ट्रेन मिले हैं, पहला स्ट्रेन है ‘क्लेड-1’, जो मध्य अफ्रीकी देशों में मिला है और यह सबसे घातक स्ट्रेन है और इसकी चपेट में आने वाले करीब 10 फ़ीसदी लोगों की मौत हो गई. इसके बाद दूसरा है ‘क्लेड-2’, जो कम हानिकारक है और ज्यादातर देशों में यही स्ट्रेन सामने आया है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस स्ट्रेन की चपेट में आने वाले 99.99% लोग ठीक हो जाते हैं.

क्या हैं इसके लक्षण? 
मंकीपॉक्स के लक्षण वायरल बुखार जैसे होते हैं... इसके शुरुआती लक्षणों में सिर दर्द बुखार, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना और थकावट होना शामिल है. हालांकि दो से तीन दिन बाद पेट में दर्द, गले में सूजन और शरीर पर चकत्ते पड़ जाना और कुछ दिन बाद शरीर पर बड़े-बड़े फफोले जैसे दाने निकलना, खासकर गुप्तांगों पर पानी वाले दाने और छाले पड़ना इस वायरस के लक्षण हो सकते हैं.


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कैसे करें बचाव? 
यह एक जूनोटिक बीमारी है और ये जानवरों से इंसानों में फैल सकता है, इंसानों से जानवरों में भी. ऐसे ही यह इंसानों से इंसानों में भी फैलता है. इसलिए संक्रमित लोगों से दूरी बनाएं और संक्रमित लोगों को स्वस्थ लोगों से अलग रखें. संक्रमित लोगों या जानवरों के संपर्क में आने के बाद हाथों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोना जरूरी है.  साथ ही उन जानवरों से दूर रहें जो संक्रमित हो सकते हैं. शरीर पर नए या अस्पष्टीकृत घावों या चकत्तों पर ध्यान दे. 

(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)

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