सेहत
मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण बुखार, खांसी और जुकाम जैसी स्वास्थ्य समस्याएं आम समस्या बन गई हैं! लेकिन अगर ये लक्षण तीन दिनों से अधिक समय तक रहें तो स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. आजकल की तनावपूर्ण जीवनशैली और बदलते मौसम के कारण वायरल संक्रमण और बुखार के लक्षण बहुत जल्दी दिखाई देते हैं.
मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण बुखार, खांसी और जुकाम जैसी स्वास्थ्य समस्याएं आम समस्या बन गई हैं! लेकिन अगर ये लक्षण तीन दिनों से अधिक समय तक रहें तो स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. आजकल की तनावपूर्ण जीवनशैली और बदलते मौसम के कारण वायरल संक्रमण और बुखार के लक्षण बहुत जल्दी दिखाई देते हैं.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप इस समय भी सावधान नहीं रहे तो स्वास्थ्य समस्याएं होने की संभावना अधिक है. अगर खांसी, जुकाम और बुखार तीन दिनों से अधिक समय तक रहे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और जांच कराएं और संबंधित टेस्ट करवाएं.
यदि आपको सर्दी के लक्षण तीन दिन से अधिक समय तक रहें
यदि बुखार लगातार तीन दिनों से अधिक समय तक बना रहे या बुखार आता-जाता रहे, साथ में बार-बार छींकें आएं, नाक बहे या बंद हो, तेज सिरदर्द हो, खांसी हो, थकान हो और सांस लेने में तकलीफ हो, तो यह वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता है.
अगर इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ किया जाए तो बीमारी गंभीर हो सकती है. खास तौर पर अगर आपको तीन दिन से ज़्यादा बुख़ार, खांसी और ठंड लग रही है तो तुरंत ये टेस्ट करवाएँ, ऐसा आरएमएल डॉक्टर सुभाष गिरी कहते हैं.
किस प्रकार का टेस्ट किया जाना चाहिए?
कोरोना टेस्ट
यह एक सामान्य रक्त परीक्षण है जो शरीर में संक्रमण के स्तर और रक्त कोशिकाओं की स्थिति का पता लगाता है. सीबीसी टेस्ट से पता चलता है कि आपके शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBC) बढ़ी हैं या नहीं, जिससे संक्रमण का भी पता लगाया जा सकता है! इससे यह भी समझने में मदद मिलती है कि बीमारी वायरल है या बैक्टीरियल.
सीआरपी टेस्ट
यह परीक्षण शरीर में सूजन और संक्रमण के स्तर को मापता है. यदि सीआरपी स्तर अधिक है, तो इसका मतलब है कि आपके शरीर में सूजन या जीवाणु संक्रमण हो सकता है. यह परीक्षण करवाने से आपके डॉक्टर को यह तय करने में मदद मिल सकती है कि आपको एंटीबायोटिक्स देना है या नहीं.
इन परीक्षणों के क्या लाभ हैं?
डॉ. सुभाष गिरी के अनुसार, यदि आप समय पर ये दोनों टेस्ट करवा लेते हैं, तो इससे डॉक्टर को आपके लक्षणों के पीछे का असली कारण जानने में मदद मिलेगी और यह जानने में भी मदद मिलेगी कि इसके लिए किस तरह के उपचार की आवश्यकता है.
केवल घरेलू उपचार पर ही निर्भर न रहें
आमतौर पर जब लोग सर्दी, खांसी और बुखार जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव करते हैं, तो वे अदरक की चाय, हल्दी वाला दूध या काढ़ा जैसे घरेलू उपचारों से इसे ठीक करने की कोशिश करते हैं. लेकिन भले ही ये सभी घरेलू उपाय पर्याप्त राहत देते हों, लेकिन अगर समस्या तीन दिनों से अधिक समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से परामर्श करना और जांच करवाना बहुत ज़रूरी है.
डॉक्टर की सलाह
खांसी के साथ कफ में खून आए, सांस लेने में दिक्कत हो, बुखार 102 डिग्री से ज्यादा हो, बच्चा या बुजुर्ग अस्वस्थ हो या पहले से कोई गंभीर बीमारी (अस्थमा, मधुमेह) हो तो देरी न करें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. इस पर अमल करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)
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