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Stem Cell Therapy: तंबाकू केवल फेफड़ों, हृदय और ब्लड वेसल्स को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि यह शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता को भी कमजोर करता है. आज के समय में गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले स्टेम सेल और रीजनरेटिव थेरेपी जैसे आधुनिक उपचार का असर भी इसकी वजह से कम हो सकता है.
Smoking And Stem Cell Therapy: तंबाकू केवल फेफड़ों, हृदय और ब्लड वेसल्स को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि यह शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता को भी कमजोर करता है. इतना ही नहीं, आज के समय में गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले स्टेम सेल और रीजनरेटिव थेरेपी जैसे आधुनिक उपचार का असर भी इसकी वजह से कम हो सकता है. इस कंडीशन में यह समझना जरूरी है कि इन उपचारों की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि शरीर अंदर से कितना स्वस्थ है और उसकी हीलिंग व रिकवरी की क्षमता कितनी अच्छी है.
तंबाकू आज भी दुनिया के सबसे बड़े रोके जा सकने वाले स्वास्थ्य खतरों में से एक है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल 70 लाख से अधिक लोगों की मौत तंबाकू के कारण होती है. वहीं सेकंड हैंड स्मोक यानी पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में आने से लगभग 16 लाख लोगों की समय से पहले मृत्यु हो जाती है. दुनिया के करीब 1.3 अरब तंबाकू उपयोगकर्ताओं में से लगभग 80 प्रतिशत लोग निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं, जहां तंबाकू से जुड़ी बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है.
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डॉ. गीतिका जस्सल, मेडिकल स्पोक्सपर्सन, क्रायोविवा लाइफ साइंसेज के मुताबिक, स्टेम सेल और रीजनरेटिव थेरेपी का उद्देश्य शरीर में डैमेज टिश्यू की रिपेयर करना, इन्फ्लेमेशन को कम करना, नई ब्लड वेसल्स के निर्माण को बढ़ावा देना और सेल्स की रिकवरी में मदद करना होता है. लेकिन तंबाकू का सेवन इन सभी प्राकृतिक प्रक्रियाओं में बाधा डालता है. सिगरेट के धुएं में हजारों हानिकारक रसायन मौजूद होते हैं, जो शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति को कम करते हैं, ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं, ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करते हैं और लंबे समय तक इन्फ्लेमेशन की स्थिति पैदा करते हैं. आसान शब्दों में कहें तो तंबाकू शरीर में ऐसा माहौल बना देता है, जो हीलिंग और रिकवरी की प्रक्रिया के लिए अनुकूल नहीं होता.
स्टडी के मुताबिक, निकोटिन वयस्क स्टेम सेल्स पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. यह सेल्स के सामान्य व्यवहार को प्रभावित कर उनकी टिश्यू रिपेयर करने की क्षमता को कम कर सकता है. मानव पीरियोडॉन्टल लिगामेंट से प्राप्त स्टेम सेल्स पर किए गए शोध में भी पाया गया है कि धूम्रपान स्टेम सेल्स की वृद्धि, उनके फैलाव और नए टिश्यू में विकसित होने की प्रक्रिया को बाधित कर सकता है. ये सभी प्रक्रियाएं प्रभावी टिश्यू रीजनरेशन के लिए बेहद जरूरी होती हैं. शोध बताते हैं कि धूम्रपान करने वालों में घाव भरने की प्रक्रिया, धूम्रपान न करने वालों की तुलना में लगभग दोगुनी धीमी हो सकती है.
एक्सपर्ट के मुताबिक, चाहे कोई मरीज हड्डियों और जोड़ों की चोटों, दांतों और मसूड़ों के टिश्यू लॉस, घाव भरने, हेयर रिस्टोरेशन, स्किन रिपेयर या किसी अन्य रीजनरेटिव ट्रीटमेंट से गुजर रहा हो, तंबाकू का सेवन उसके उपचार के परिणामों को प्रभावित कर सकता है. यह शरीर की उपचार के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया देने की क्षमता को कम कर देता है. इस स्थिति में सबसे आधुनिक और एडवांस्ड रीजनरेटिव तकनीकें भी अपना पूरा लाभ नहीं दे पातीं, अगर शरीर के सेल्स लगातार निकोटिन, हानिकारक रसायनों और ऑक्सीजन की कमी के प्रभाव में रहते हैं.
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