सेहत
Summer Heat And Mental Health: बहुत ज्यादा गर्मी मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित कर सकती है, इसकी वजह से आप समर SAD या रिवर्स SAD की चपेट में आ सकते हैं, आइए जानें इसके बारे में...
गर्मी का असर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर भी पड़ता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक हीटवेव (Summer Heat) का असर सिर्फ डिहाइड्रेशन या सनबर्न तक सीमित नहीं है, कई लोगों को इसकी वजह से थकान, उदासी, बेवजह गुस्सा आने जैसी समस्याएं होने लगती हैं. जी हां, बहुत ज्यादा गर्मी मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित कर (Summer Heat And Mental Health) सकती है, जिससे लोग समर SAD या रिवर्स SAD की चपेट में आ सकते हैं.
बता दें कि जिस तरह सर्दियों में SAD यानी सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (Seasonal Affective Disorder) होता है, वैसे ही कुछ लोगों को गर्मियों में डिप्रेशन और तनाव की समस्या का सामना करना पड़ता है. इसे ही समर SAD (Summer SAD) या रिवर्स SAD कहा जाता है...
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक गर्मी के मौसम में हमारे शरीर का हॉर्मोन सिस्टम प्रभावित होता है और इसकी वजह से खासतौर से सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे ‘फील गुड’ हॉर्मोन्स का स्तर गिर सकता है. वहीं ऐसी स्थिति में डीहाइड्रेशन से शरीर का इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बिगड़ जाता है, जो न्यूरोट्रांसमीटर को प्रभावित करने का काम करता है. ऐसे में लोग गर्मी में मूड डाउन, फोकस में कमी और बेचैनी जैसी समस्या महसूस करते हैं.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक जो लोग पहले से तनाव, एंग्जायटी या डिप्रेशन से जूझ रहे होते हैं, उनके लिए यह मौसम और समस्या खड़ी कर सकता है. ऐसी स्थिति में बुजुर्ग, बच्चे और वे लोग जो ज्यादा धूप में रहते हैं, उनमें ‘समर सेड’ के लक्षण दिख सकते हैं.
इसके लक्षण आमतौर पर नींद, भूख और मूड से जुड़े होते हैं. ऐसी स्थिति में व्यक्ति को भूख कम लगती है, नींद कम आती है और लगातार बेचैनी या चिड़चिड़ापन बना रहता है. इसके अलावा ऐसी स्थिति में लोगों में घबराहट, मानसिक थकान, आक्रामक व्यवहार और गुस्सा भी बढ़ जाता है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक समर सेड से बचने के लिए लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव असरदार हो सकते हैं, इसके लिए दिन में पर्याप्त पानी पिएं, हल्का और संतुलित भोजन करें, धूप में कम निकलें सुबह या शाम की सैर की आदत डालें. इससे मूड को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. साथ ही इस स्थिति में कमरे को ठंडा और शांत रखें और नींद का पूरा ध्यान रखें. इसके अलावा ऐसी स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना ज़रूरी होता है.
Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.)
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