सेहत
हर महिला का शरीर उम्र के साथ बदलता है. कभी बालों का झड़ना, चेहरे पर झुर्रियां जैसी समस्याएं होती हैं. इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए अक्सर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी महिलाए ले लेती हैं, लेकिन हार्मोन थेरेपी क्या सुरक्षित है?
हर महिला का शरीर उम्र के साथ बदलता है. बालों का झड़ना, चेहरे पर झुर्रियां पड़ना ये सब आम बात है. समस्या तब और बढ़ जाती है जब महिला रजोनिवृत्ति से गुजरती है. एक महिला के लिए, यह एक दर्दनाक दौर होता है क्योंकि इस चरण में उसका मन से लेकर शरीर तक के साथ से युद्ध चल रहा होता है.
ऐसे में शरीर में दर्द, ह्ड्डियों में कमजोरी, मूड स्विंग्स से के साथ ही कई तरह के कैंसर तक का खतरा बढ़ने लगता है. ऐसे में महिलाओं को अक्सर शारीरिक समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी का सहारा लेना पड़ता है. लेकिन क्या महिलाओं के लिए वही हार्मोन थेरेपी लेना सुरक्षित है? हार्मोन थेरेपी कितनी उचित है, विशेषकर 65 वर्ष की आयु के बाद?
मेनोपॉज़ जर्नल में ऑनलाइन प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि केवल उम्र के आधार पर किसी महिला में हार्मोन थेरेपी को रोकने के लिए कोई सामान्य नियम मौजूद नहीं है. मेनोपॉज़ सोसाइटी के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में कहा कि 65 वर्ष की आयु के बाद, खुराक के आधार पर महिलाओं का जोखिम भिन्न हो सकता है.
पिछले कई शोध ये दावा करते रहे हैं कि महिलाओं में हार्मोन थेरेपी से कई दीर्घकालिक हानिकारक प्रभाव देखने को मिलते हैं लेकिन नई स्टडी का दावा बिलकुल अलग है. शोधकर्ताओं ने 2007 से 2020 तक 10 मिलियन वृद्ध महिलाओं का अध्ययन किया.
इसमें पाया गया कि 65 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में स्तन कैंसर, फेफड़े के कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, कंजेस्टिव हृदय विफलता, शिरापरक थ्रोम्बोम्बोलिज्म, एट्रियल फाइब्रिलेशन में महत्वपूर्ण जोखिम में कमी देखी गई. महत्वपूर्ण रूप से, प्रोजेस्टिन के उपयोग से एंडोमेट्रियल कैंसर, डिम्बग्रंथि कैंसर, इस्केमिक हृदय रोग, कंजेस्टिव हृदय विफलता और शिरापरक थ्रोम्बोम्बोलिज़्म का खतरा काफी कम हो गया.
इसलिए अगर आप मेनोपॉज के दौर में हैं या इसके बाद भी आप डॉक्टर के सुझाव के बाद हार्मोन थेरपी ले सकती हैं और इससे डरने की जरूरत नहीं होगी.
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(Disclaimer: यह लेख केवल आपकी जानकारी के लिए है. इस पर अमल करने से पहले अपने विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें.
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