सेहत
हाई कोलेस्ट्रॉल (High Cholesterol) को कम करने के लिए जिस मेडिसिन का इस्तेमाल किया जाता है उसमें स्टेटिन्स (STATINS ) साॅल्ट होता है. लंबे समय तक इस दवा का प्रयोग लिवर डैमेज (Liver Damage) से लेकर कई अन्य बीमारियों का खतरा (Risk of Diseases) पैदा करता है.
डीएनए हिंदी: जब ब्लड (Blood) में मोम की तरह चिपचिपा सा पदार्थ (Wax-Like Substance) जमने लगता है तो ब्लड सर्कुलेशन (Blood Circulation) प्रभावित होता है. साथ ही ब्लड में गाढ़ा भी होने लगता है. ऐसे में स्ट्रोक (Stroke), हाई बीपी (High BP) और लकवा (Paralysis) के साथ ही दिल की बीमारियों (Heart Diseases) का खतरा बढ़ता है. ब्लड में फैट (Fat) को कम करने के लिए तब दवा लेनी पड़ती है. ये दवा कोलेस्ट्रॉल तो कम करती हैं, लेकिन इसके नुकसान भी शरीर को बहुत होते हैं.
कोलेस्ट्रॉल की दवा में मौजूद स्टेटिन्स ब्लड से वसा कम करता है लेकिन लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से लिवर बुरी तरह से प्रभावित होता है. इतना ही नहीं, शरीर में हेपेटाइटिस जैसे लक्षण या फ्लू जैसी समस्या भी होने लगती है.
एनएचएस के अनुसार स्टैटिन का उपयोग एंजाइमों के स्तर को बढ़ा देता है जो लिवर की सूजन के लिए जिम्मेदार हेाते हैं. अगर आपके शरीर में 6 प्रकार के लक्षण नजर आएं तो आप तुंरत अपने डॉक्टर से संपर्क करें क्योंकि ये खतरे की निशानी है.
लिवर में सूजन जिसे हेपेटाइटिस के रूप में जाना जाता है और इस बीमारी में फ्लू जैसे लक्षण नजर आते हैं.
फ्लू जैसे लक्षणों में ये भी हैं शामिल
स्टैटिन लेने के ये साइड इफेक्ट भी होते हैं जो फ्लू की तरह नजर आते हैं. अगर आपको फ्लू जैसे ये संकेत लंबे समय तक नजर आएं तो आप अपने डॉक्टर से जरूर बात करें.
ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन (बीएचएफ) की रिपोर्ट बताती है कि स्टैटिन प्रभावी रूप से ब्लड से कोलेस्ट्रॉल को कम करती और जानलेवा स्ट्रोक और दिल के दौरे के जोखिम को कम कर देती है लेकिन इसके साइड इफेक्ट भी कम नहीं.
लिवर को प्रभावित करने के साथ ही ये पाचन तंत्र की समस्याएं, जैसे कब्ज, दस्त,अपच, मांसपेशियों में दर्द और नींद की समस्या भी पैदा करती हैं. गंभीर संकेतों में ये अग्न्याशय (Pancreatitis) की सूजन, मुंहासे या खुजली वाले लाल चकत्ते, यौन समस्याएं, जैसे कामेच्छा में कमी (Decreased Sex Drive) या स्तंभन दोष (Erectile Dysfunction) का भी कारण बनती है.
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