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Uncontrolled Blood Sugar: डायबिटीज रोगियों में अनकंट्रोल शुगर से गैंगरीन का होता है खतरा, इस अंग में होने लगती है सड़न

डायबिटीज में अगर ब्लड शुगर लगातार अनकंट्रोल रहे तो गैंग्रीन नामक बेहद गंभीर बीमारी का खतरा होता है. इस बीमारी में अंग काटने तक की नौबत आ जाती है.

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Uncontrolled Blood Sugar: डायबिटीज रोगियों में अनकंट्रोल शुगर से गैंगरीन का होता है खतरा, इस अंग में होने लगती है सड़न


डायबिटीज रोगियों में अनकंट्रोल शुगर से गैंगरीन का खतरा

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डीएनए हिंदीः डायबिटीज ( Diabetes) ऐसे बीमारी है जो अगर अनियंत्रित रहे तो किडनी (Kidney) से लेकर हार्ट (Heart) तक को नुकसान पहुंचाती है. इतना ही नहीं ये एक बेहद खतरनाक बीमारी गैंग्रीन (Gangrene)  का कारण भी बनती है. इस बीमारी में पैरों में सड़न होने लगती है और इंफेक्शन का खतरा पूरे शरीर में फैल सकता है. ब्लड शुगर ( Blood Sugar)vके कंट्रोल न रहने पर होने वाली इस बीमारी के बारे में चलिए आपको विस्तार से बताएं. 

ब्लड शुगर के मरीजों के पैरों में अधिकतर ही आपने देखा होगा कि घाव, कट या स्किन बेहद पीली नजर आती है. वहीं उन्हें फोड़े-फुंसी की समस्या भी खूब होती है. ऐसा केवल ब्लड शुगर के बेहद अधिक होने पर ही होता है. पैरों में फंगल इंफेक्शन अगर लंबे समय तक रहे तो आपको इसे खतरे की घंटी मानकर सतर्क हो जाना चाहिए और शुगर को कंट्रोल करने का हर संभव प्रयास करना होगा. 

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क्यों होती है पैरों में ही सबसे ज्यादा समस्या
इसके पीछे एक बड़ा कारण ये होता है कि जब भी शुगर का लेवल ब्लड में अधिक होता है तो बल्ड सर्कुलेशन भी खराब होता है और इसका पहला असर पैर पर होता है. पैर में लंब समय तक ब्लड के रुके रहने और सही सर्कुलेशन न होने से घाव, इंफेक्शन या फोड़े-फुंसी ज्यादा होने लगते हैं. 
ब्लड सर्कुलेशन कम होने से कोई इंफेक्शन इसी कारण जल्दी सही नहीं हो पाता है और पैरों में गैंग्रीन जैसी बीमारी होती है. 
 
क्या है ये गैंग्रीन 
गैंग्रीन एक ऐसी बीमारी हैं जिसमें अंगों में ब्लड सर्कुलेशन न होने से सड़न पैदा होती है. प्रभावित हिस्से के टिश्यू सड़ जाते हैं और इससे इंफेक्शन पूरे शरीर में बढ़ने लगता है. इंफेक्शन रोकने के लिए ही जहां तक गैंग्रीन  का प्रभाव होता है वहां तक अंग को काट दिया जाता है. क्योंकि ये पैर में ही होता है इसलिए डायबिटीज के मरीजों को अपने पैर पर विशेष नजर बनाए रखनी चाहिए. 

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गैंग्रीन होने से कैसे रोंकें

  • सबसे पहले अपने शुगर को कंट्रोल में रखें. एक्सरसाइज करें और खानपान में नियं़़त्रण रखें. 
  • पैरों में घाव, फोड़ा होने पर उसे नजरअंदाज न करें. अगर पैर पीले दिख हरे या सूजन के साथ इंफेक्शन महसूस हो तो तुंरत डॉक्टर से संपर्क करें.
  • कई बार गैंग्रीन के कारण पैरों में सुन्नपन आने लगता है. इसे भी नजरअदंाज न करें. 
  • पैरों की सफ़ाई और नाखूनों की सफाई करते रहें और गर्म पानी में नमक डाल कर सिकाई किया करें या हाइड्रोजन पैरॉक्साइड एक बाल्टी पानी में दो चम्मच डाल कर अपने पैर कुछ देर के लिए रखें. उसके बाद उसे अच्छी तरह हवा में सुखाएं. 
  • डायबिटीज के मरीज मोजे और जूतें का ध्यान रखे. लंबे समय तक मोजा या  टाइट फिट वाले जूते न पहनें. 
  • अपने पैरों एंटी फंगल पाउडर का छिड़ाव करते रहें और एंटी सेप्टिक लोशन भी लगाएं. 
  • विधारा के पत्ते गैग्रीन का अचूक इलाज करते हैं. इसके लिए विधारा के पत्ते को कूटकर उसमें कायाकल्प तेल और हल्दी लगाकर लेप बना लें और इसे अपने घाव पर लगाएं. इस लेप को धोने के लिए आप नीम के पानी का उपयोग करें.

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 इन आयुर्वेदिक गोलियों का करें सेवन
गैंगरीन को कंट्रोल करने के लिए बाबा रामदेव के अनुसार खाना खाने से पहले दो.दो गोली आरोग्य वटी और कायाकल्प वटी लें. खाना खाने के बाद कैशोर गुग्गुल लें. आप कायाकल्प क्वाथ का भी प्रयोग कर सकते हैं. गैंगरीन ज्यादा बढ़ने पर 1.2 ग्राम ताल सिंदूर का भी सेवन कर सकते हैं.

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