हेपेटाइटिस बी एक लिवर की बीमारी है जिसे समय रहते पहचाना न जाए तो खतरनाक रूप ले सकती है. जानें यहां हेपेटाइटिस बी के लक्षण और बचाव के तरीके.
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान की आदतें शरीर में कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे रही हैं. इन्हीं में से एक है हेपेटाइटिस बी, जो एक गंभीर वायरल इंफेक्शन है जो लिवर को प्रभावित करता है. इसके शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते है. कई लोग सालों तक इससे संक्रमित रहते हैं और उन्हें तब तक पता भी नहीं चलता जब तक लिवर बुरी तरह से डैमेज नहीं हो जाता, इसलिए इस बीमारी को साइलेंट किलर भी कहा जाता है. जब यह बीमारी पुरानी हो जाती है तो लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है. तो आइए यहां जानते हैं हेपेटाइटिस बी के लक्षण, यह कैसे फैलता है और इससे कैसे बचा जा सकता है.
हेपेटाइटिस बी के लक्षण
- थकान
- बुखार
- जी मिचलाना और उल्टी
- पेट दर्द, खासकर लिवर वाली साइड
- भूख न लगना
- जोड़ों में दर्द
- गहरे रंग का पेशाब
- पीली त्वचा और आंखें
हेपेटाइटिस बी कैसे फैलता है?
- संक्रमित व्यक्ति के खून के संपर्क से संक्रमण.
- जन्म के दौरान संक्रमित मां से उसके बच्चे में संक्रमण.
- संक्रमित सुइयों या सीरिंज का उपयोग.
- संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध.
- किसी संक्रमित व्यक्ति का रेजर या टूथब्रश शेयर करना.
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बचाव के तरीके
- हेपेटाइटिस बी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका वैक्सीनेशन है. यह उन लोगों के लिए बहुत जरूरी है जिन्हें हेपेटाइटिस बी होने का ज्यादा जोखिम है.
- इस्तेमाल की गई सुइयों और सिरिंजों का इस्तेमाल करने से बचें. हेपेटाइटिस बी से संक्रमित किसी व्यक्ति के साथ कभी भी सुई और सिरिंज साझा न करें, क्योंकि इससे आपको संक्रमित होने का जोखिम बढ़ सकता है.
- हेपेटाइटिस बी से संक्रमित व्यक्ति को रेजर, टूथब्रश, नेल कटर आदि का उपयोग करने से बचना चाहिए. इनमें खून के निशान हो सकते हैं, जिससे संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है,
- अगर आपको किसी के खून या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में आना पड़े तो हमेशा सुरक्षा सावधानियों का पालन करें. चोटों का इलाज करते समय या घावों को साफ करते समय विशेष सावधानी बरतें. संक्रमित खून के संपर्क में आने से हेपेटाइटिस बी का खतरा बढ़ सकता है.
- प्रेग्नेंट महिलाओं को हेपेटाइटिस बी की जांच करानी चाहिए ताकि अगर संक्रमण हो जाए तो जन्म के समय बच्चे को प्रोटेक्टिव टीके और एंटीबॉडी दी जा सकें.
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. इस पर अमल करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)