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रिसर्च में खुलासा, Rheumatoid Arthritis का जोखिम बढ़ाती है आंत में होने वाली ये समस्या

Rheumatoid Arthritis: हाल ही में हुए एक शोध में शोधकर्ताओं ने आंत के माइक्रोबायोम में उन परिवर्तनों का पता लगाया है, जिनके कारण रूमेटाइड अर्थराइटिस की शुरुआती होती है.

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रिसर्च में खुलासा, Rheumatoid Arthritis का जोखिम बढ़ाती है आंत में होने वाली ये समस्या

Rheumatoid Arthritis 

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रूमेटाइड गठिया (Rheumatoid Arthritis) एक ऐसी पुरानी ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के स्वस्थ ऊतकों पर हमला करती है और इसके कारण जोड़ों में सूजन, दर्द, अकड़न, और कार्यक्षमता में कमी आती है. ऐसी स्थिति में मरीज का चलना-फिरना भी दुश्वार हो जाता है. बता दें कि हाल ही में हुए एक शोध में शोधकर्ताओं ने आंत के माइक्रोबायोम में उन परिवर्तनों का पता लगाया है, जिनके कारण रूमेटाइड अर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis Causes) की शुरुआती होती है. ऐसे में अब इस बीमारी का समय रहते उपचार संभव हो सकेगा.. 

क्या कहती है स्टडी?
शोधकर्ताओं ने इस शोध में पाया कि रोगियो में क्लिनिकल रूमेटाइड गठिया विकसित होने से लगभग 10 महीने पहले आंत में सूजन पैदा करने वाले बैक्टीरिया अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं. इसके लिए शोधकर्ताओं ने रूमेटाइड अर्थराइटिस विकसित होने के जोखिम वाले 124 लोगों पर 15 महीने तक नजर रखी और पांच अलग-अलग समयों पर मल और रक्त के नमूनों का उपयोग करके आंत के माइक्रोबायोम प्रोफाइल में हो रहे परिवर्तनों का आकलन किया. 

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इस शोध में पाया गया कि रूमेटाइड अर्थराइटिस होने से 3 महीने पहले पीड़ितों ने जोड़ों में दर्द की शिकायत की, मरीजों के शरीर में एंटी-साइक्लिक सिट्रुलिनेटेड प्रोटीन (Anti-CCP) नामक एंटीबॉडी पाई गई, जो कि स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करती है और आर्थराइटिस के लक्षण पैदा कर सकती है.

शोध में पता चली ये बात 
इसके अलावा जिन व्यक्तियों के आंत के माइक्रोबायोम में सूजन पैदा करने वाले बैक्टीरिया अधिक थे उनमें रूमेटाइड आर्थराइटिस विकसित होने का जोखिम अधिक था और इन व्यक्तियों में आंत के माइक्रोबायोम की विविधता भी कम हो गई थी. यह एक महत्वपूर्ण संकेत है कि आंत में होने वाले परिवर्तन आर्थराइटिस की शुरुआत से पहले ही होते हैं.

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इलाज की नई उम्मीद 
ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि माइक्रोबायोम की कमी या असंतुलन आर्थराइटिस जैसे ऑटोइम्यून डिजीज के जोखिम को बढ़ा सकता है. इससे भविष्य में रूमेटाइड आर्थराइटिस के जोखिम को पहचानने में आसानी होगी. आंत के माइक्रोबायोम को समझने से न केवल आर्थराइटिस की शुरुआत का पता लगाया जा सकता है, बल्कि स्पेशल ट्रीटमेंट भी अपनाया जा सकता है. हालांकि इसपर अभी और ज्यादा रिसर्च की जरूरत है.

(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ से परामर्श करें.)  

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