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Diabetes दे सकती है पेट से जुड़ी ये गंभीर बीमारी, इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

Diabetes को अगर लंबे समय तक कंट्रोल में न रखा जाए तो इसके कारण पेट से जुड़ी ये गंभीर बीमारी हो सकती है. आइए जानें इसके लक्षण क्या हैं और कैसे होगा इससे बचाव...

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Diabetes दे सकती है पेट से जुड़ी ये गंभीर बीमारी, इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

Gastroparesis or Diabetes

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खानपान में गड़बड़ी, खराब जीवनशैली (Bad Lifestyle) और अन्य कई कारणों की वजह से आजकल लोग पेट से जुड़ी बीमारियों से परेशान रहते हैं. ऐसी स्थिति में ब्लोटिंग होने लगती है, कभी खाना खाने का मन नहीं करता, तो कभी उबकाई औ उल्टी जैसा महसूस होता है. लेकिन, आज हम आपको पेट से जुड़ी एक ऐसी बीमारी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो डायबिटीज (Diabetes) में शुगर लेवल को कंट्रोल में नहीं करने से होता है.

इस बीमारी में पेट की गति धीमी पड़ जाती है, जिससे कई (Gastroparesis or Diabetes) तरह की गंभीर समस्या होने लगती हैं. ऐसे में अगर आप भी डायबिटीज के मरीज हैं तो इस बीमारी, इसके लक्षण और बचाव के बारे में जरूर जान लें... 

क्या है ये बीमारी?  (Gastroparesis)
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब डायबिटीज कंट्रोल में नहीं होती, तो इसके कारण गैस्ट्रोपेरेसिस नाम की बीमारी हो सकती है. इस बीमारी में पेट की गति कम हो जाती है. इसके अलावा कुछ इंफेक्शन भी गैस्ट्रोपेरेसिस का कारण बनते हैं. वहीं पेट की सर्जरी के बाद भी ये दिक्कत हो सकती है. इसके अलावा कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों में भी पेट की गति धीमी हो जाती है, जिसके कारण गैस्ट्रोपेरेसिस हो सकता है.

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क्या हैं इसके लक्षण?   (Gastroparesis Symptoms)

  • पेट फूलना
  • भूख न लगना
  • बार-बार उल्टी आना या उल्टी जैसा महसूस होना
  • वजन का कम होना

इसका क्या है इलाज?  (Gastroparesis Treatment)
गैस्ट्रोपेरेसिस से बचने के लिए ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखना सबसे ज्यादा जरूरी है, क्योंकि शुगर कंट्रोल में रहने से गैस्ट्रोपेरेसिस की संभावना कम हो जाती है. दरअसल, लंबे समय तक शुगर लेवल अगर कंट्रोल में न रहे तो इससे पेट की नसों और मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे गैस्ट्रोपेरेसिस की बीमारी हो सकती है. ऐसे में शुगर लेवल को कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी है. इसके अलावा साफ-सुथरा और सेहतमंद खाना भी इससे बचने में मदद करता है.

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 इसकी जांच के लिए एंडोस्कोपी, इलेक्ट्रोगैस्ट्रोग्राफी और गैस्ट्रिक एंप्टिंग स्टडीज़ से की जाती है. इलाज के लिए प्रोकायनेटिक दवाएं दी जाती हैं. ये दवाएं पेट की गति सुधारती हैं और इसके लक्षणों को कम करने का काम करती हैं. हालांकि कुछ गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है, इसमें गैस्ट्रिक बाईपास किया जाता है. 

(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. इस पर अमल करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)

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